Published On:Thursday, November 28, 2013
Posted by NJFI media
क्या मीडिया बिकाउ है?

उज्जैन। देश की संवाद पालिका, प्रजातंत्र का यथार्थ में चैथा स्तम्भ है, किन्तु उस पर तो कारपोरेट जगत का एकाधिकार है। मीडिया संवाद व खबरों का व्यापार कर रही है। संवाद सेवा अब व्यापार हो गया। मीडिया पैकेजवाद व विज्ञापनवाद की हिरासत में ह। मोदी को प्रधानता से प्रचारित करने हेतु मोदी गेंग ने मीडिया को खरीदा शाश्वत सत्य हैं केजरीवाल की सीडी उजागर हुई। केजरीवाल ने मीडिया पर 1400 करोड रूपये लेने का आरोप लगाया। प्रिन्ट मीडिया न राजनैतिक दलों के प्रादेशिक संगठनों से विज्ञापन अनुबंध हेतु पैकेज किए। संवाद कर्मियों ने पेडन्यूज की बजाय पैकेजवाद का चरित्र अपनाया। संवाद कर्मियों को संभ्रात भिखारी मानकर धन भी दिया गया है। प्रायोजित कार्यक्रम भी मीडिया ने आयोजित किए।
जनता का सोच है की मीडिया भी महाभ््राष्टाचार धनखोर, पैकेजवादी एवं अफवाह बाज है। सत्य की प्रस्तुति से विमुख है। मीडिया प्रदूषित विकाउ व लक्ष्यहीनता की हिरासत में है। जनसोच व निर्णय को झूठलाया नहीं जा सकता। तरूण तेजपाल कांड से भी मीडिया प्रतिष्ठा को आघात लगा है। वर्तमान के वातास, परिवेश व साक्ष्यों के आधार पर सही बहस जारी है की क्या मीडिया विकाउ है। सोश्यल मीडिया को भी विकृत किया जा रहा, राजनैतिक व उथलों चेहरों द्वारा। प्रत्येक मीडियाकर्मी एवं मीडिया प्रतिष्ठान अपना अपना आत्मचिंतन,इसी वक्त करे और अपना अपना सत्य स्वीकारे।


