Published On:Friday, November 29, 2013
Posted by NJFI media
मंत्रालय में आग लगाने का षडयंत्र किसका
उज्जैन। मतदान के बाद, जो खबरे व खुफिया रपट आ रही थी वे बेहद चैकान वाली थी। भाजपा सत्ता से दूर नजर आ रही थी, मनरेगा, पंचायत, खनिज विभाग में महाभ्रष्टाचार हुए हैं सभी का विवरण फाईल व जांच प्रतिवेद नों मं था। मतदान समाप्ति के बाद रात्रि को ही मंत्रालय में सक्रियता देखी गई थी व अफसर भी सक्रिय थे। इसी से अंदेशा था की कुछ न कुछ अप्रिय हादसा या घटना अवश्य होगी। सरकारी, कर्मचारियों का भी मोह भंग हो गया था और लफाजी ने भी खूब संेंध लगाई थी। आयबी की खुफिया रपट में भी भाजपा सत्ता से दूर नजर आने की संभावना जतायी जा रही थी।
मनरेगा, पंचायत, खनिज व अन्य विभागों में महाभ्रष्टाचार हुआ है। फाइल्स, खुलती व लोग अंदर जाते। फाइल्स जलाना ही एक मात्र विकल्प था। मंत्रालय में षडंयत्री आग की घटना हुई। आग लगी या लगाई गई सबसे बडा सवाल हैं आग लगने के पूर्व दो बार आगजनी का हल्की घटनाएं भी हुई थी। बाद में बडा अग्निकांड हो गया। इस अग्निकांड के पीछे कौन लोग है किसका हाथ है, किसने षडयंत्र रचा, किसने षडयंत्र को मूर्तरूप दिया मनरेगा, पंचायत, व खनिज विभाग की फाइल्स व प्रतिबैदन जले। लगभग 12 हजार जल कर खाक हुई। सुरक्षा में चूक किसकी रही, आग लगाने का लक्ष्य तो साफ है किन्तु चेहरे छुपे हुए हैं। सेक्युरिटी विभाग की लापरवाही भी स्वंय सिद्ध है।
मंत्रालय में लगी आग, सुनियोजित षडयंत्र ही नजर आ रहा है। प्रदेश की जाॅंच ऐजेन्सी शायद ही निष्पक्ष जाॅंच कर पाये। अतः मंत्रालय की आग की जाॅंच म.प्र. सरकार सीबीआय से ही कराये। मंत्रालय की आग एक राजनैतिक षडयंत्र भी हो सकता है। मुख्यमंत्री व अन्य भी अग्निकांड पर मौन है। फाइल्स व प्रतिवेदन जलाने से भ्रष्टाचार कभी छुप नहीं सकता। सभी मामले सार्वजनिक हो चुके है। सीबीआय जाॅंच से ही सारा सत्य सामने आयेगा।


