Published On:Saturday, November 30, 2013
Posted by NJFI media
भ्रष्टाचार विहीन एवं समतामूलक स्वर्णिम समाजवादी व्यवस्था हेतु अण्णा आंदोलन करें लोकपाल छोड़े
उज्जैन। गाॅंधीवादी अण्णा हजारे निःसन्देह देश के दूसरे जेपी है। उनके गुरू यादव महाराज सूफीवादी संत ही थे। अण्णा हजारे शुचिता मंत्री राजनीति, भ्रष्टाचार विहीन एवं सुव्यवस्थावादी देश एवं सामाजिक भावनाओं से ओतप्रोत है जन लोकपाल निःसन्देह पारदर्शिता की व्यवस्था है, किन्तु राजनीति के पण्डो और गुण्डों को पसंद व स्वीकार नहीं संसद को दलों व नेताआं ने ही बंधक बना रखा है ऐसी स्थिति में जनता का लोकपाल बिल सांसद पास नहीं होगा। अब अण्णा को दूसरा मार्ग ही अपनाना होगा। अण्णा चिन्तक है व जनभावनाआं को मूर्तरूप देने में नहीं हिचकते हैं।
10 दिसम्बर से अण्णा अनशन करेगे 10 दिसम्बर को अण्णा जन संसद बुलाये और जनभावनाओं व सुझाव आमंत्रित करें। एनजेएफआई के माध्यम से अण्णा को जनभावनाओं से परिपूर्ण सुझाव प्रेषित हैं।
जिस प्रकार गरीबी की सीमा रेखा तय उसी तरह देश में अमीरी की सीमा रेखा भी तय हो उसकी इकाई परिवार हो, वह चोहे संयुक्त हो या विभक्त निर्धारित सीमा से अधिक की चल अचल संपत्ति राजसात करने का प्रावधान हो तथा भविष्य में निर्धारित संपत्ति से अधिक चल अचल मिले या विदेश में जमा हो तो समूची चल अचल संपत्ति राज सात करने का प्रावधान हो। इस व्यवस्था ेस भ्रष्टाचार कालाधन, जमाखोरी गरीबी, भूमि हीनता व मुनाफाखोर, स्वत समाप्त होगी। इस भावानात्म सुझाव को और अधिक धारदार प्रभावी बनाये।
राजनैतिक प्रदूषण, सत्ता लोलुपता व छिछालेदार राजनीति समाप्त करने हेतु केन्द्र व प्रदेशों में दलीय आनुपातिक पद्धति के आधार पर लोकप्रिय सरकारे गठित करने की संवैधानिक व्यवस्था, महामहिम करे ताकि देश व प्रदेश को उत्तरदायी सरकारे प्राप्त हो सके।
क्षेत्रवाद की समाप्ति हेतु तथा आर्थिक नियंत्रण हेु देश विकास, उद्धार, गरीबी उन्मूलन विदेशी व स्वदेशी आतंकवाद समाप्ति, गरीबी उन्मूलन अंधो संरचना आधारित व केन्द्रत अर्थव्यवस्था, भारत को कारपोरेट इन्डिया की बजाय सच्चा भारत निर्माण प्रत्येक प्रकार शिक्षा व उपचार की निःशुल्क व्यवस्था जीवनोपयोगी बस्तुएं, न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराने तथा अपराध विहीन देश की योजनाओं व कार्यो की सूची महा महिम जारी करे तथा केन्द्र व प्रदेश सरकारे उसे मूर्तरूप में दे।
जन लोकपाल छोडो और उपरोक्त बिन्दुओं पर ही 10 दिसम्बर से आंदोलन करे। देश की 90 प्रतिशत जनता उनके साथ खडी नजर आयेगी जन संसद के प्रत्येक निर्णय का नेताओं की संसद को अनिवार्य रूप से स्वीकारना ही होगा। जो जनता चाहती है, वही कानून संसद बनायेगी। राष्टपति जन संसद के अध्यक्ष व नेता होगे।


