Published On:Friday, December 27, 2013
Posted by NJFI media
1026 लोगों की हत्या का दोषी कौन
2002 में गुजरात दंगों में 1026 लोग मारे गए। यह शाश्वत सत्य है। गुजरात दंगों में मानवीय मूल्यों की कू्रर हत्याएॅं हुई। मातृशक्ति के स्तन तथा गर्भस्थ शिशुओं तक की हत्याएॅं को गई यह भी शाश्वत सत्य है हत्याओं का कारण उन्माद, झूठी सिद्धंातवादिता, बहशीपन घिनौनी मानसिकता पूर्वाग्रही मनो स्थिति एवं आतंकी राजनीति ही मुख्य कारण रही है यह भी शाश्वत सत्य है। गुजरात दंगों में हिन्दुत्व मुस्लिम लोग मरे यह भी शाश्वत सत्य है। गुजरात दंगों मं आदमी ही मरे है वे चाहे जिस वर्ग के हो यह भी शाश्वत सत्य ह। इतनी बडी कू्ररता भरा नरसंहार उन्माद एवं सुनियोजित षडयंत्र का ही परिणाम है यह भी शाश्वत सत्य है। दंगां के समय कानूनी व्यवस्था का दायित्व मोदी सरकार था यह भी सत्य है। उस वक्त मोदी की सरकार थी पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी भी दंगे की स्थिति का जायजा लेने गुजरात गए थे, दंगों के बारे में उन्होने कहा था की गुजरात दंगों ने विश्व के सामने भारत की सिर झुकाने की स्थिति ला दी हैं। अटलजी ने बयान में कहा था की मैं यह लाशे गिनने नहीं शान्ति व व्यवस्था हेतु आया हॅंूु। दंागें को रोकने में सरकार के अपना सच्चा राजधर्म निभाना था। उस वक्त मोदी ने अटल को जबाव दिया था कि मैंने अपना राजधर्म निभाया है, यह बयान कुटिल व कूटनीति मुस्कान के साथ दिया गया था यह भी शाश्वत सत्य है। गुजरात दंगों के अपराधियों में मंत्री व पार्टी सतर के लोग भी अपराधी सिद्ध हो चुके है यह भी सत्य है। मामले ने तूल पकडा तो न्यायालय ने एसआयटी से जाॅंच कराय। एसआयटी की जाॅंच से पीडित सन्तुष्ट नहीं थे और आज भी नहीं है यह भी शाश्वत सत्य है। एसआयटी न्यायालय का ही अंग है उसने जाॅंच निष्पक्षता से की या प्रभावित होकर जाॅंच रपट प्रस्तुत की इस पर भ्रम की स्ाििति है। गुजरात में आज भी मोदी की सरकार है और पेटोल, डीजल के दाम भी बढे हुए हैं। एक बिन्दू मात्र शकास्पद है और बाकी सभी बाते शाश्वत सत्य है तो न्याय पालिका को अपने स्व. विवेकाधिकार का उपयोग करना जरूरी हो जाता है। दंगो में गुजरात सरकार तक के मंत्री दोषी पाए गए है तो सरकार और उसका मुख्यिा कैसे अछूुता रह सकता है। बिना मुख्यमंत्री सहमति व शह के उसकी सरकार का कोई मंत्री दंगों का नेतृत्व कर ही नहीं सकता। एसआयटी में भी आदमी ही होते है और आदमी ही तो भूल व गलती करता है। एक बात स्पष्ट है की सत्य पर भ्रम खडा हो सकता है, भ्रम पर सत्य नहीं। गुजरात दंगे का सत्य, नायक, षडयंत्री, चेहरे उजागर हुए हैं किन्तु पर्दे के पीछे वाले चेहरों पर न्याय की हिरासत में नहीं आसके है। न्याय साक्ष्यों पर आधारित होता है कुछ साक्ष्यों आसानी से प्राप्त हो सकता है और कुछ साक्ष्यों को स्वविवेकाधिकार द्वारा ही प्राप्त करना होता हे जिसके दर्शन ीाारत में बहुत ही कम नजर आते हैं।
न्यायिक तराजू में मोदी को क्लीन चिट भले ही दे दी हो, किन्तु मोदी जैसा पूर्वाग्रही षडयंत्री, झूठ शिरोमणी व स्वार्थी महत्वचकाक्षी प्रायोजित वाद में विश्वास करने वाले तथा सत्य की कू्रर हत्या करने वाले मोदी को मानवता तो कभी बेगुनाह नहीं मान सकते है जिन निर्दोशों का कू्ररता से कत्ल हुआ है उसका बदला तो नियति किसी न किसी रूप में अवश्य लेगी। आम आदमी की भी यही धारणा है। न्यायालय के निर्णय का सम्मान जनता द्वारा कर रही है किन्तु मानवता तो दगां के षडयंत्री नायक को कभी नहीं छोड सकती हैं सत्य को न तो साक्ष्य की जरूरत होती है और न ही जाॅंच। गुजरात दंगों का अपराधी मोदी सरकार थी यह शाश्वत सत्य है एसआयटी को अपराधी सरकार सत्य से कैसे परिचित करवाती सत्य भी नहीं छुपता वह तो कही भी किसी न किसी रूप में प्रकट हो ही जाता हैं।


