Published On:Wednesday, December 18, 2013
Posted by NJFI media
कलियुगी घृतराष्ट शिवराज 18.12.2013
उज्जैन। जनकोष का दुरपयोग कर, शिवराजसिंह विज्ञापनों, होर्डिग्स, पदों व लाल बत्तियों की रेवडियाॅं बाटकर मीडिया व राजनैतिक मैनेजमेंट के माध्यमसे अपने आपको प्रदेश में स्थापित करने मं सफल रहे ह। वे स्वंय को जनता का सेकव, उद्धारक, सेवा व नव विकास का मसीहा जातते है। किन्तु यथार्थ में तो शिवराज म.प्र. के कलियुगी राजनैतिक घृतराष्ट है। सत्य उन्हे पसंद व स्वीकार ही नहीं। प्रदेश में बहुआयामी अराजकता,नौकरशाहों क ेभ्रष्टाचार, उन्माद व मंत्रियों के कुकृत्य व धनखोरी, भाजपाईयों के उन्माद, चरित्र खोती पुलिस और चरित्रहीन होती व्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही। सत्ता सुन्दरी के अपने शरीर से चिपकाये रखना अंध विश्वास को पनपाना और गाॅंव गाॅंव की पगडडियों तक भ्रष्टाचार के कल्पवृक्ष रोपना उनका चरित्र हैं। व्यापम घोटाला, पुलिस भर्ती घोटाला, मगनजी घोटाला रायल्टी घोटाला, खदान, आवंटन घोटाला जे.पी. सीमेनट रीवा अवैध उद्योग, उज्जैन का सिलींग व ताकायम भूमि घोटाला, जिनकी सीबीाअय जाॅंच जरूरी है। उन्हें नजर नहीं आ रहे और नहीं सीबीआय जाॅंच करा रहे। दागियों को भूमाफियाओं, खनिज व शिक्षा माफियाओं के सरगना बनने पर हर्षित व गर्वित है। नए कक्ष में पूजन किया और सत्य स्वीकारने की बजाय व्यवस्था को दोषी बताया व कहा की व्यवस्था बदलना जरूरी है। पद पर बैठते ही सोश्यल इन्जिनियरिंग शुरू की लोकसभा 2014 के आम चुनाव हेतु। कन्यादान व निकाह राशि 25 हजार की ताकि भाजपाई शातिर भ्रष्टाचार कर सके।
शिवराज में प्रशासकीय समीक्षा व कठोर कदम उठाने की क्षमता ही नहीं है। महंगाई का ठीकरा केन्द्र पर फोडते है उर्जा ईधन पर 25 प्रतिशत का वेट कर वसूल कर, पेटोल, डीजल, रसोई गैस व घासलेट को महंगा करते यदि सच्चे जन सेवक हो तो उर्जा ईधन पर वेटकर तुंरत शून्य करा। शिवराज कलियुगी घृतराष्ट है सत्ता उनका लक्ष्य है। राजधर्म जन धर्म व उद्धारकधर्म निभाना उनका चरित्र नहीं है। अपने पर अनेक मुखौटे लगा कर जनता को मूर्ख बना रहे है जनहित में जो कार्य करना है वे कर ही नहीं रहें है। सत्ता के दलीय स्वार्थ ही उनका नीति नियत चरित्र और विभाग हैं।


