Published On:Saturday, December 21, 2013
Posted by NJFI media
राहुल मोदी का मीडिया परीक्षण
उज्जैन। देश का प्रधानमंत्री बनने हेतु मोदी राहुल में रसाकसी जारी है। भाजपा ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित किया। कांगे्रस 17 जनवरी को राहुल गाॅंधी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करेगी। यथार्थ मं मादी और रालु की योग्यता पर अनेक प्रश्न चिन्ह है। गंभीरता से विचार जरूरी है।
सार्वप्रथम चुनाव परिणाम के पूर्व प्रधानमंत्री की घोषणा करना ही अवैधानिक है। यह अधिकार निर्वाचित सांसदों का है न कि दलों का। अतः कांगे्रस व भाजपा निर्वाचित सांसदों के अधिकारो का हनन कर रही है मोदी व राहुल की घोषणा ही व्यर्थ है। निर्वाचित सांसद ही देश का प्रधानमंत्री चुनेगे यदि प्रधानमंत्री पद का निर्वाचन जनता द्वारा किया जाता तो घोषणा नीतिगत होगी। जनता कांगे्रस व भाजपा की घोषणा की अमान्य कर रही हैं।
सूक्ष्म सर्वे में पाया गया की मोदी और राहुल गाॅंधी देश के प्रधानमंत्री पद के योग्य ही नहीं है। जन निर्णय शाश्वत सत्य को मूर्त रूप देने वाला निर्णय हैं मोदी व राहुल क्यों अयाग्य है जनता ही बयान कर रही हैं।
नरेन्द्र मोदी- लम्बे क्रमिक विकास प्रक्रिया द्वारा गुजरात, धन व उद्य़ोग सम्पन्न प्रदेश बना है। मोदी स्वंय को गुजरात विकास का मसीहा बता रहे है, यह सफेद झूठ है। यदि गुजरात काविकासमोदी ने किया है तो 155 लाख करोड का कर्जा गुजरात पर क्यों हैं? गुजरात में दो नंबरी कार्यो का बाहुल्य क्यों है अजा व जजा परेशान व गरीबी कार्यो का बाहुल्य क्यों है, अजा व जजा परेशान व गरीबी से क्यों जूझ रहे है गुजरात में महंगाई क्यों है गुजरात की सामाजिकता प्रदूषित क्यों है। भ्रष्टाचार विहीन गुजरात का दावा मोदी भरते है तो नारायण से 15 करोड की रिश्वत का मामला क्यों उठा। पोरबंदर भाजपा सांसद रादडिया ने भाजपाईयों पर 350 करोड के घोटाले का आरोप क्यों लगाया। कितने फर्जी एनकाउन्टर किए या करवाये, मोदी स्वीकार क्यों नहीं कर रहे। गुजरात 2002 के दंगों में 1026 लोगों की निर्मम हत्याएॅं हुई। मोदी ने अपना राज धर्म नहीं निभाया। अटलजी ने सत्य स्वीकारा तो कुटिल मुस्कान क्यों बिखेरी, अटलजी को व्यय में क्यों कहा की मैने अपना राजधर्म निभाया। हिरेण पण्डया की हत्या किसने व क्यों करवायी। केसुभाई पटेल की धोती खोखने का षडयंत्र क्यों व किसने रचा। निष्ठावान संघी संजय जो भी की फर्जी सीडी किसने व क्यों बनवायी उनके गुजरात में सक्रिय हरने पर प्रतिबंध क्यां लगवाया। बजारां के आरोपों पर मोदी मौन क्यों है, पण्डया को झूठे आरापो में किसने व क्यों घेरा। अमितशाह को क्यों बचाया मोदी यथार्थ मं प्रतिक्रियावादी, अहंकारी, पूर्वाग्रही, षडयंत्री, झूठ बोलने में सिद्ध हस्त है, पॅंूजीपतियों, कालेधन, कुबेरों , कारपोरेट जगत व उद्योगपतियों के दल्ले क्यों बने, मीडिया मैनेजमेंट तीन हजार क्यों व्यय किए, प्रधानमंत्री पद हथियाने हेतु 10 हजार करोड कहाॅं से आये, कितना धन उद्योग पतियों व कालेधन कुबेरों व कारपोरेट जगत से लिया। प्रायोजित सभाएं करके तथा उसमें गुजरात के लोग भेज कर, अपनी झूठी लोकप्रियता क्यों जताई। भोपाल भाजपा महाकुम्भ में भाजपा के वरिष्ठों को अपनी गेंग से जुड करवा कर सभी को अपमानित क्यों किया, सेना में राजनीति फैलाने का कुप्रयास क्यों किया। देश की धरोहर सरदार पटेल का राजनीतिकरण क्यों कर रहे, गुजरात दंगों के अपराध क्यों नहीं स्वीकार रहे। उ.प्र. में धार्मिक उन्माद फैलाने हेत अमितशाह व अपनी गंग क्यों भेजी, भाजपा में अपने समर्थक दलाल क्यों खडे किए, अडवाणी जैसे वरिष्ठ व अनुभवी नेता को हाशिये पर धकलेने के प्रयास क्यों किए। मोदी क्या है उपरोक्त बिन्दुओं से ही स्पष्ट हैं मोहन भागवत के भी भ्रमित कर, उनकी व संघ की साख गिराने की पल क्यों की
उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर देश की जनता एवं भाजपा के चंद नेताओं को छोड मोदी को प्रधानमंत्री पद का योग्य नहीं माना जा रहा। अब मोहन भागवत को समझ आई उनका विवेक जागृत हुआ तो उन्होंने भी कह दिया अडवाणी भाजपा की अनिवार्यता है। मोदी प्रधानमंत्री पद के योग्य नहीं है सिंह होता है मोदी अपने आप में घिनौना चेहरा हैं।
राहुल गाॅंधी- नेहरू खानदान की विरासत हैं नहरू गाॅंधी खानदार ने बहुत कुरबानी दी है उसका प्रतिफल भी उन्हे मिला। यह जरूरी नही की प्रतिफल हमेशा ही मिलता रहे। सोनिया गाॅंधी न अपना धर्म इसमें शंका ही नहीं। शहीद की पत्नि है समूचा देश उनका सम्मान करता रहा है और करता रहेगा, उनका सम्मान सच्चा देश धर्म ही अटल अडवाणी ने भी देश धर्म निभाया है। यदि वे प्रधानमंत्री बनती है तो जनता उनके साथ है किन्तु वे प्रधानमंत्री के रूप मं बलात थोपना चाहते है। राहुल गाॅंधी जनता को पसंद व स्वीकार नही है इसके अनेक कारण है राहुल के पास राजनैतिक व सामाजिक अनुभव की बहुत कमी हैं चापलूस ने राहुल को सच्चा राजनैतिक शुरू तक की बहुत कमी है। सोनिया गाॅंधी की चापलूसी हेतु राहुल गांधी को गैस का गुब्बारा बना कर राजनैतिक व्यौम में उडाया। ये वे ही तत्व ह जिन्होंन कांगे्रस को अगणित छंदो वाला गुब्बारा बनाया और सोनिया गांधी को हरवाया यह बात सोनिया भी स्वीकार चुकी है किन्तु राहुल को यह बात समझ में नहीं आ रही। उनके उडने की सीमा भी समाप्त हो चुकी हैं नव आकाश, नए पंखों के साथ नव उडान जरूरी है किन्तु राहुल तैयार नही है। राहुल गा।धी ही बताय की 10 साल से केन्द्र में कांगे्रस सरकार है। समूच देश में महंगाई और गरीबी, बेरोजगारी व्याप्त है। गरीबी की थाली में रोटी दाल व प्याज तक क्यों गायब हुआ। केन्द्र ने राज्यों को भरपूर सहायता दी, उनके व्यय व परिणामों की समीक्षा क्यों नहीं की गई। मनरेगा में खूब भ्रष्टाचार हुआ। म.प्र. में सर्वशिक्षा अभियान में खूब बदंरबाट हुई सभी ने बहती गेंगा में हाथ धोये। उर्जा ईधन पर राज्यों ने वेटकर 28 प्रतिशत लगा कर उर्जा ईधन महंगे किए। घरेलू गैस सिलेंण्डर की गलत नीति जारी की गई, कागजों के जंजाल खड किए गए, घरेलू गैस सिलेंण्डर की नीति अभी तक नहीं बनी। सबसीडी वाले सिंलेण्डर 12 तक नहीं किए सबसीडी बैंक खाते में डालने की बजाय सबसीडी काटकर सिंलेण्डर का मूल्य निर्धारित क्यों नहीं किया गया। सबसीडी पर टेक्स क्यों काटा जा रहा? कृषि व व्यवसायिक डीजल का वर्गीकरण क्यां नहीं किया गया। चारों राज्यों में उपरोक्त कारणां के कारण भी कांगे्रस हारी। प्रदेशों चारों राज्यों में निजी हाथों में देकर, बिजली महंगी की गई। केन्द्र सरकार मौन रही सर्वप्रकार की शिक्षा व उपचा्रर व्यवस्था निःशुल्क नहीं की गई शिक्षा व उपचार माफियाओं की लूट जारी हैं समूचे देश में माफियाराज व अराजकता विद्यमान है। केन्द्र सरकार व राहुल गाॅंधी मौन रहे ह। राहुल गाॅंधी ने सरकार से उपरोक्त बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा। भ्रष्टाचार को राष्टीय व सामाजिक सरकार व कल्पवृक्ष माना, राहुल व केन्द्र सरकार मौन रही, अण्णा आंदोलन में राहुल गांधी क्यों नहीं गए। बडे बडे मंचों से प्रायोजित भीड वाली सभाओं में पारावारिक पृष्टभूमि को आधार बना कर सहानूभूति क्यों चाही, आम आदमी की बातों, मजबूरियों समस्याओं व समाधान की योजना प्रस्तुत क्यों नही की। मोदी शाब्दिक लफाजी में राहुल से बहुत आगे है राहुल ने अपनी वाक्तव्य शैली क्यों नहीं सुधारी। सभाओं की बजाय जनता से जुडने व सीधे सम्पर्क की पहल क्यों नहीं की। विदेशी व स्वदेशी आतंकवाद को राहुल भूल ही गए।


