Published On:Saturday, December 28, 2013
Posted by NJFI media
ईवीएम मशीन की तकनीकी पर सवाल और बबाल
म.प्र. में शिवराजसिंह हैटिक बनाने का जश्न मना रहे है। मंत्री मण्डल गठित का विभागों का वितरण कर चुके हैं। 6 जनवरी से नव विधान सभा का सत्र शुरू होगा। अनुपूरक वित्तीय मांगे अनुमोदित होगी।
अभी तो सवाल ईवीएम मशीन के साफटवयर पर सवाल उठ खडा हुआ है गुजरात की कम्पनी को दिया था। उस कम्पनी ने ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया। राजेन्द्र यादव इंदार से सपा प्रत्याशी के उनके घर में 16 मतदाता थे। 12 ने राजेन्द्र यादव के पक्ष मं मतदान किया था। उनके पक्ष में मात्र दो ही मत निकले। डाले गए 10 मत कौन से प्रत्याशी के खाते में गए ह। प्रदेश की अनेक मशीनों में मतदान के बाद 1 नवम्बर का बटन दबाने पर दो नम्बर की लाईट क्यों जली। क्या मतदान के पूर्व सभी मतदान केन्द्रों पर माक व्हेटिंग व माक काउन्टिग हुआ था इसके सम्बंध में भी कोई जानकारी प्रत्याशियां के अधिकृतों को दी गई या नहीं ईवीएम के साफटवेयर पर प्रश्न चिन्ह ही लग गए हें कोइ्र बडा षडयंत्र होने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। जब 12 मतों डाले गए मतों में से 10 मतपत्र दूसरे प्रत्याशी के खाते में गए तो 2 लाख वाले निर्वाचन क्षेत्र मे तो स्थिति ही पूरी बदल जाना स्वभाविक है। ईवीएम की तकनीकी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगना स्वभाविक है। अनेक मतदान केन्द्रों पर खराब ईवीएम की अनेक शिकायते भी हुई है।
निर्वाचन संबंधी शिकायत न्यायालय में याचिका लगाकर राजेन्द्र यावद ने की है यदि ईवीएम साफटवेयर मे धांधली पाई जाती है तो म.प्र. विधान सभा का निर्वाचन परिणाम षडयंत्र का प्रतीक होगा। म.प्र. में पुनः विधानसभा चुनाव करना अनिवार्य होगा।
मामला अतिरोचक है। सभी ईवीएम मशीन में लगे साफटवेयर चुनाव आयोग ने डुप्लीकेट बनाकर सुरक्षित रखे है या नहीं, यह बात भी जनता जानना चाहेगी। अब तो ईवीएम साफटवेयर की जाॅंच अनिवार्य हो गई। कही ऐसा तो नहीं की गुजरात की ईवीएम मशीन कम्पनी के साथ मिलकर कोई षडयंत्र रचा हो।
लोकसभा चुनाव में तो और अधिक सक्रियता व निगरानी की जरूरत ही लोकसभा चुनाव में ईवीएम साफटवेयर ठेका गुजरात की कम्पनी को न देकर कर्नाटक, पं. बंगाल, तमिलनाडू व अन्य राज्यों की कम्पनी को दना चाहिए। मामला अतिरोचक है। जनवरी के प्रथम या द्वितीय सप्ताह र्में वीएम साफटवेयर तकनीकी भूल या षडयंत्र का राज उजागर होगा। म.प्र. चुनाव आयोग की अपनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। राजेन्द्र यादव प्रकरण से ईवीएम के साफटवयर संबंधी घटना से गहरे प्रयोजित एवं सुनियोजित षडयंत्र के संकेत प्राप्त हो रहे है।


