Published On:Wednesday, January 1, 2014
Posted by NJFI media
2013 को विस्मृत कर 2014 में देश नव निर्माण के नव संकल्प
उज्जैन। समय चक्र निरंतर गतिशील रहता है। जो उसके सामने अहं दंभ शौर्य व शक्ति प्रदर्शन करता है समय चक्र उसे उसकी औकात बताने मं नहीं चूकता। जो भी भौतिक पंच तत्वों से संरचित है उसकानष्टीकरण भी तय है यह शाश्वत सत्य है। समय चक्र प्रतिपल खट्ठे मीठे और कडवे परिणाम देते हुए सभी को संचेत भी करता रहता है। विवेकवादी समय चक्र को मान सम्मान देकर उसके समक्ष नतमस्तक होकर अपना प्रारब्ध स्वर्णिम बनाने में संलग्न ही रहता हें भूत की बजाय वर्तमान को ध्यान रखते हुए अपनी जीवनयात्रा पूर्ण करना ही सच्चा सन्मार्क होता है।
वर्ष 2013 बीता कल है, वह तो रसातल में जा चुका हैं वर्ष में उन्माद, राजनैतिक नाटक नौटंकी, जीत हार, षडयंत्र, प्रायोजित त्रासदीयाॅं दिग्गजों का इस जगत से अन्र्तध्यान होना महंगाई में फंसे रहना, नेताओं दल्लां, नौकरशाहों, पॅूजीपतियों, कारपोरेट जगत वायदा कारोबारियों मिलावटियों तस्करों सभी किस्म के माफिया समूहों ने देश व जनता को खूब लूटा। बेईमानी कुसंस्कार राजनीति के पण्डों और गुण्डों विदेशी व स्वदेशी आतंकियों काआतंक बेईमानी मार्ग पर चलते राजा और रंक, सभी तरफ अहुआयामी उन्मादवाद का राज। मातृशक्ति पर कू्रर प्रहार व शोषण आध्यात्मिक डकैतों, तत्वों के कू्रर आतंक से शर्मसार है।
2014 को हम नव आशा, विश्वास एवं संकल्पों के साथ अभिवादन करे स्वागत करे और व नव संकल्पों को आत्मिक पावनता के साथ मूर्तरूप देते हुए अपनी जीवन यात्रा को आनंदित बनाये। शाश्वत सत्य है की समस्या के जन्म के साथ ही समाधान भी जन्म लेता है। हमारी दृष्टि समाधान पर होना जरूरी है। देश की सभी व्यवस्थाओं सुसंस्कारों नीति नियत चरित्र व्यवहार लक्ष्य ही अति कू्रर प्रदूषित है। तिमिर और अंधा युग व धन हमारे साध्य हो गए है। हम सब दोहरे चरित्र वाले बहुआयामी ही हो गए है। स्व. की चिंता में है देश , समाज व लोक की नहीं। औपचारिकता भ्रम तिमिर स्वार्थ, घिनौनेपन व विवेकहीनता जीवनयात्रा हमारा लक्ष्य हो गा है। हम सब दोहरी एवं दोगली मानसिकता में जी रहे हैं। यह हमारा अपना शाश्वत सत्य है। नियति ने हमें अमृत घट के रूप में अवतरित किया था और हम अपने कुकर्मो से विषघट हो गए दोषी हम है कोहराम भी हम मचाते है। और दोष अपने भाग्य व ईश्वर को दते है। हम स्वर्णिम प्रारब्ध देश समाज, व्यवस्था चरित्र संस्कार, व्यवहार कार्यो एवं परिणाम का संकल्प अवश्य ले।
हम स्वयं विवेकवादी होकर, सभी के विवेकदीप, प्रज्वलन का महामहोत्सव प्रतिपल मनायेगे और ज्योति की सार्वभौम सत्ता स्थापित करेगे। देश, समाज, व्यवस्था, अपने संस्कारों कार्यो व परिणामों की स्वर्णिमता के साथ पूर्ण कर देश समाज प्रकृति सुंस्कार हमारे जीवन यात्रा का मार्ग होगा। हम बहुआयामी क्राति एवं परिणामों पर विचार करेगे और उन्हे मूर्तरूप देगे। दूषित एवं प्रदूषित व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित सर्वसम्मान भावनाएॅं एवं चरित्र रखेगे। राजा और रंक मिलकर, देश के समाज को स्वर्णिम बनायेगे। राजा रंक के विचारां व भावनाओं को सम्मान के साथ मूर्तरूप देगा। वर्तमान के हलाकन परिवेश से मुक्ति हेतु व्यवस्थाओं मं निम्न सुधार जरूरी है।
देश में प्रत्येक व्यक्ति का सर्वप्रकार की शिक्षा, उपचार की निःशुल्क व्यवस्था होगी। 666 लीटर पानी प्रत्येक परिवार को निःशुल्क मिलेगा। घरेलू बिजली की वर्तमान दर में 50 प्रतिशत की कमी हो। उर्जा ईधन पर कोई भी राज्य 1 प्रतिशत का वेट कर न लगाए। घरेलू सबसीडी वाले सिंलेण्डर की संख्या 12 हो ना चाहिए।सबसीडी काट कर ही सिलंण्डर की राशि उपभोक्ताओं से ली जाये। कृषि कार्य का डीजल 35 रूप तथा व्यवसायिक डीजल का रंग अलग हो तथा उसमें वितरण केन्द्र भी अलग हो। प्रत्येक वाहन में पारदर्शी टेंक अनिवार्य रूप से होना चाहिए। शिक्षा उपचार तथा उद्योग तथा उद्योग माफियाओं का सफाया किया जाए गुंडावाद को जडमूल से समाप्त किया जाए। देश में अंधो संरचना आधारित व मानवीय मूल्यों स परिपूर्ण अर्थ व्यवस्था स्थापित कि जाये। सर्व कल्याण एवं विकास किया जाये। हर हाथ को काम दो योग्यता व क्षमतानुसार प्रत्येक परिवार स्वंय में सुसंस्कारित सच्चा सेवक और उद्धारक चरित्रवादी स्वंय को बनाये। सर्व सम्मान के सुसंस्कार को प्रतिपल जीवन में मूर्तरूप दे। भ्रष्टाचार, कालेधन ध्न को साध्य बनाने के चरित्र को समाप्त करने हेतु देश में अमीरी की सीमा रेखा तय हो उसकी इकाई परिवार चाहे वह विभक्त हो या संयुक्त निश्चित हो। राजनीति के पण्डों गुण्डां के आतंक समाप्ति हेतु केन्द्र व प्रदेशां में लोकप्रिय सरकारों का गठन होना अनिवार्य है।
वर्ष 2014 में उपरोक्त संकल्पां को राजा और रंक मूर्तच्प देकर, देश समाज और व्यवस्था के नव निर्माण हेतु उपरोक्त संकल्पों को मूर्तरूप देना ही सार्थक जीवन होगा। देश की 80 प्रतिशत वंचित वर्ग का यही संकल्प की व्यवस्था और सत्ता पर उसका सार्वभौम अधिकार हो और देश का सचालन उसकी भावनाआं के अनुरूप हो। उपरोक्त संकल्प देश में नव कं्राति एवं नव निर्माण के आदालन की मशाल हैं।


