Published On:Saturday, January 4, 2014
Posted by NJFI media
लोकसभा चुनाव 2014 और देश
उज्जैन। लोकसभा चुनाव 2014 मई में सम्पन्न होगे। राजनीति के पण्डे और गुण्डे, पॅंूजीपतियों कालेधन कुबेरो, माफियाओं, कारपोरेट जगत के दल्ले उन्ही क चंदे से सत्ता सुन्दरी के अपहरण के षडयंत्र रच रहे है। पॅंूजीपति, कालेधन कुबेर, उद्योगपति व कारपोरेट इलेक्टाल न्यास कर, सत्ता सुन्दरी के रसिकों को चुनावी चंदा देने की पहल कर रहे है। सभी दल और गठबंधन नाटक नौटंकी कर रहे है। मीडिया को खरीद रहे है और मीडिया बिक भी रहा है। यह शाश्वत सत्य है।
मोदी जो नाजीवादियों, पॅंूजीपतियों कालेधन कुबेरों, कारपोरेट जगत का दल्ला है। वह प्रायाजित रैलियों व अनेक प्रकार की नाटक नौटकी कर रहा हैं कांगे्रस अपना जनाधार खो चुकी है, वह पुनः जनाधार प्राप्ति की टोह में है। तीसरे मोर्चे की आहट भी हैं नव उदित आप भी मैदान में उत्तर चुकी है। राजग टुट चुका हैं कौन होगा प्रधानमंत्री यह निर्धारण वियजी सांसद ही करते है। भाजपा ने मोदी को, अपने केजरीवाल को और कांगे्रस राहुल को प्राजेक्ट कर रही है। संप्रग का प्रधानमंत्री होगा हय तय है। कौन होगा प्रधानमत्री यह सहयोगी दल तय करेगे। नीतिश, मुलायम भी दाड में शरीक है। सभी को सत्तासुन्दरी की चाहत है व उसके लिए कुछ भी करने को तैयार है। वर्ष 2014 राजनैतिक उठापटक का वर्ष रहेगा। लोकसभा चुनाव नाजीवादी ताकतों व पंथ निरपेक्ष ताकतों के बीच हो रहा है। 90 प्रतिशत पंथ निरपेक्ष जनता, नाजीवादियों के खिलाफ है। मोदी तो अपने आपको प्रधानमंत्री ही मान रहे थे, किन्तु गांधीवादी रूप से मोदी गुब्बारे में अनक छेद कर दिए है। उसमें चाहे जितनी हवा भरी जाये वह कभी नहीं फूलेगा। 2014 चुनाव में त्रिशंकु स्थिति रहेगी। क्षेत्रीय दल भारी पडेगे। गठबंधनों के गठबंधन की सरकार बनेगी। आप की स्थिति किंग मेकर की हागी। दिल्ली से भाजपा व कांगे्रस का सफाया। उ.प्र. में चार दलों का स्केचर व बिहार में तीन दल्लों का त्रिशूली त्रिकोण बना तो भाजपा अपने पूर्व आकडे पर भी शायद ही पहॅुचेगी।
जनता चाहती है कि दलीय अनुपातिक पद्धति से वे केन्द्र व राज्यों में लोकप्रिय सरकारों को स्थापना की संवैधानिक व्यवस्था पर अभी से विचार कर निर्णय लिया जाये ताकि प्रजातंत्र हास्यास्पद स्थिति में न आये। देश की जनता नाजीवाद कभी स्वीकार नहीं कर सकती है।


