Published On:Wednesday, January 15, 2014
Posted by NJFI media
सभी राजनैतिक दलों कासोच, चिंतन निर्णय व कार्मिकता ही प्रदूषित
उज्जैन। देश के सभी दल, सत्ता सुन्दरी हेतु अनेक प्रकार की नाटक नौटंकीया कर रहे है। स्वंय को श्रेष्ठ व अन्यों को बेदम दर्जे वाला जताने का प्रयास कर रहे ह। सभी दलों की नीति नियत, चरित्र सोच चिंतन, निर्णय कार्मिकता व लक्ष्य ही विकृत है। सत्ता सुन्दरी की प्राप्ति हेतु लोक तंत्र को लोभतंत्र बना रहे है और जन चरित्र की भिक्षावादी, सुविधावादी व अकर्मण्यवादी बना रहे है। श्रम की पूजा व महत्व समाप्त कर रहे हैं। झूठी, सिद्धातवादिता सभी का आधार बनी हुई हैं। आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक सास्कृतिक तथा आध्यात्मिक प्रदूषण भी सभी दल फैला रहे है, स्वस्थ व स्वर्णिम मानसिकता, चरित्र, व्यवहार, विचार नीति व नियत से किसी को सरोकार नहीं। सभी सत्ता और राजनीति को व्यवसाय धन की चक्की ही मान रहे हैं। धन जो साधन है उसे ही साध्य बना बैठे हैं। कोई भी अपने आपको सुधारने हेतु तैयार नहीं। यह बात अब सार्वजनिक हो चुकी हं।
सभी दल, देश, समाज, व्यवस्था संस्कार आध्यात्मक धर्म को वर्ग व क्षेत्रीयता में बाट रहे हैं।
ये घिनौनी स्थिति राजनैतिक दलों व नेताओं की देन हैं। संचतों यह है कि हम सबसे पहले मानवतावादी, राष्टीय इन्सान है हमारा धर्म,ईमान, सत्य हमारा अपना देश हैं। देश दो वर्गे में है। एक वर्ग है सुखी सम्पन्न है जो 20 प्रतिशत है दूसयरा वर्ग वंचित वर्ग है जो 80 प्रशित है। 20 प्रतिशत का सत्ता, सम्पदा, व्यवस्था पर एकाधिकार है और वही वर्ग 80 प्रतिशत का रक्त पीकर, उसके कंकाल तक खाना चाहता हैं। देश के 80 प्रतिशत जनता को शाब्दिक पॅंूजीपतियों, कारपोरेट के दल्ले, साम्प्रदायिक धार्मिक उन्माद सत्ताखोर, मुखौटेबाज चहरों को दल्लों की जरूरत ही नहीं। 80 प्रतिशत वंचितों अब समग्र क्रान्ति व पंथ निरपेक्षता की पक्षधर है।


