Published On:Tuesday, January 7, 2014
Posted by NJFI media
शहर को जलाकर अपना अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते है लोग
उज्जैन। मंगलवार को मध्याह शहर की शांत एवं सौहाद्ध वातावरण व परिवेश में जहर घोला असामाजिक तत्वो ने। प्रशासन ने ताबडतौड कदम उठाये और शहर में धारा 144 लागू की। लोगों के मुंह स बाते सुनी। मामला अति गंभीर व संगीन नजर आया। एनजेएफआई तो पुलिस और प्रशासन को लंबे समय से संचेत कर रहा था कि दंगे की आग में शहर को जलाने के सुनियोजित षडयंत्र रचे जा रहे है। यह षडयंत्र दिसम्बर 2013 से चल रहा है शहर में अनेक घाटनाए भी घटित हुई जो षडयंत्रों को मूर्तरूप देने मं योगदान कर गई। दोषी तो सभी है क्यों की दूसरे के मकानों को जला कर अपना राजनैतिक आर्थिक एवं सामाजिक हाथ गर्म करना चाहते है। पुलिस और प्रशासन को हर चेहरे, संगठन व षडयंत्रों का संज्ञान है, किन्तु सभी अपनी कर्तव्यों से विमुख नजर आ रहे है। मुख्यरूप से खुफिया तंत्र पुलिस प्रशासन कट्टरपंथी व दल ही है। ये ही तत्व शहर की शांति एकता, अमन चैन के शत्रु है। पुलिस प्रशासन व खुफिया तंत्र को सभी का संज्ञान है, किन्तु भीड राजनैतिक दबाब और जनछाप सौजन्यी कारणों से कठोर कार्यवाही नहीं करता। समूचा शहर कुव्यवस्थाओं अराजकता, उन्माद, शातिर कुचक्रों व षडयंत्रों मचाने मं व्यस्त है दिनांक 7.1.14 को शहर में धारा 144 लागू होने वाली की सूचना देने वाला वाहन भी अराजकता की हिरासत में फंसा। पुलिस वाहन का सायटन बज रहा था, किन्तु ठेलेवाले, वाहन चालक तथा दुकानों के सामने खडे बेतखीब व वाहन उसका मार्ग रोके रहे हैं। यदि अप्रिय हादसा शहर में हो जाता तो जितने लोग हादसे के शिकार नहीं होते उससे अधिक भगदड मं घायल होते। यह स्थिति अराजकताका स्वंय सिद्ध प्रमाण है। जूलूस निकालना, अलगाॅंव वादी नारे लगाना धार्मिक व सामाजिक उन्माद फैलाना, भडकाउ भाषण देना धर्म, संस्कृति, संस्कार के नाम पर उन्माद फैलाना, आमचरित्र हो चुका है। कौन कहाॅं, क्या क्या करता है, उसकी चाल चरित्र, चेहरा, नियति, नियत क्या है, यह पुलिस व प्रशासन को पता है किन्तु किसी पर भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही। भीडवाद के समय पुलिस, प्रशासन, नतमस्तक हो जाता है और देश समाज, उपद्रवियों, ंदगेबाजों व साम्प्रदायिकता फैलाने वालो को खुली आजादी व लूट रहा है और देश व समाजद्रोही कहते है पाये जाते है की म.प्र. को गुजरात दंगों के जैसा महौल हो जाता।
बहुआयामी अराजकता के दोषी पुलिस प्रशासन, राजनैतिक दल, राजनैतिक दल राजनैतिक व सामाजिक नेता ही सभी की सोच, चिंतन, मन मष्तिष्क व निर्णय ही साम्प्रदायिकता उन्माद, जहरीलेपन, नाटकनौटंकी से परिपूर्ण रहता है ऐसे परिवेश मं साम्प्रदायिक सद्भाव, एकता, भाईचारा कैसे संभव है। जब हर घर जलते हुए नजर आयेगे हर हृदय में उत्पीडन का दर्द होगा तो कोहराम भी सुनने वाला कोई नहीं होगा।
पुलिस प्रशासन और खुफिया तंत्र अपना राष्टीय सामाजिक देशधर्म का निर्वाहन निष्पक्षता ईमानदारी तथा दबंगता पूर्वक करें तब ही शहर में अमन चैन शांति कायम होगी। राजनीति धर्म व सामाजिकता के गुण्डां और पण्डों का दमन भी जरूरी।
प्रस्तुति को गंभीरता से ले पुलिस, प्रशासन और खुफिया तंत्र।


