Published On:Monday, January 27, 2014
Posted by NJFI media
दिल्ली में सत्ता की मनोरंजक नाटक नौटंकी प्रजातंत्र का मजाक
उज्जैन। दिल्ली में सत्ता की नाटक नौटंकी है। आप पार्टी से निष्किासित बिन्नी जतंर मंतर पर धरना दे रहे है चार विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे नाम नहीं बताये जदयू विधायक ने मुख्यमंत्री से पूछा की वे सरकार चलाना चाहते है या नहीं। मंत्री भारती को बर्खास्त करने की मांग भाजपा ने डाॅ. हषवर्धन के नेतृत्व में की और केजरीवाल के घर व कार्यालय पर प्रदर्शन किया है। केजरीवाल ने कहा सरकार अल्पमत है। बागी बिन्नी ने स्पष्ट कर दिया की उन्हें चाहे पार्टी से निकाले या भगाये वे आप के साथ हैं।
भाजपा की सत्ता पर काबिज होने हेतु जीभ लपलपा रही है। आप पार्टी के टूटने व झाडे को बिखरने के सारे प्रयास नाकाम हो रहे है। कांगे्रस अपना समर्थन आप को जारी रखने हेतु वचनबद्ध हैं। महामहिम ने भी आप पार्टी को स्पष्ट संकेत अपने देश के नाम संदेश में दे चुके हैं। केजरीवाल धर्म संकट में है। विधान सभा भंग करने की अनुशंसा भी कर सकते है। वे स्वंय स्वीकार रहे है कि सरकार अल्पमत में है और वे उसे बचाने का कोई पहल नहीं कर रहे है। दिल्ली की राजनैतिक नौटंकी का पटाक्षेप देशपति शासन के रूप में ही होगा। विधानसभा भंग कर,लोकसभा चुनाव 2.14 के साथ ही दिल्ली विधानसभा के चुनाव करना उचित होगा। शाश्वत सत्य को अंगीकार करना ही होगा अब तो हर तबका व आम आदमी भी संवादपालिका को बिकाउ धनखोर सनसनीखेज, धोखेबाज व विश्वासघाती ही मान रही है। मौलिक चिंतन एवं लेखन का चरित्र ही समाप्त हो रहा है। अनेकानेक कंेसर की रोगी है संवाद पालिका और संवादक। संवादंको नेताओ, नौकरशााहो, पॅंूजीपतियों कारपोरेट जगत तथा सभी माफिया समूहों ने संवाद पालिका को विकृत, प्रदूषित लक्ष्यवहीन धनखोर, सुविधाभोगी, लोभ व चापलूस बनाया है। चांदी के सिक्को, नृत्य करती है सुरा सुन्दरी उपहारों की चाहत, झूठी प्रशंसा धनलोभ झूठी प्रतिष्ठा और सस्करण वाद संवाद खबर व सुचरित्र की हत्या के मुख्य कारण हैं पैकेजवाद व मैनेजमेंट संवाद पालिका अब अपना आत्मचिंतन करने में भी अक्षम व असमर्थ हैं संवाद प्रतिष्ठान स्वंय को बेचने तथा कुसंस्कृति व कुअभिसमय स्थापित कर रहे है। मोदी गेंग तो संवाद पालिका की आत्मातक खाकर गर्वित ही रही है। अनेक समाचार चेनल्स स्ंवय में साक्ष्य हैं।
संवाद पालिका लक्ष्यवहीन कुमार्गी, बिकाउ कुसंस्कारी, स्वतः सुखायवादी सुविधाभोगी व धनखोर है। वह स्वंय में एक कारपोरेट गिरोह बन गई है। जन निर्णय शाश्वत सत्य हैं।


