Published On:Friday, January 24, 2014
Posted by NJFI media
मीडिया पर भ्रष्ट व धनखोर होने का आरोप
उज्जैन। गोवा के मुख्यमंत्री ने मीडिया को महाभ्रष्टाचार बताया। मीडिया तिलमिलाया। अपना सत्य जानकर। संवाद पालिका प्रजातंत्र गणतंत्र व जन भावनाओं का महत्वपूर्ण सत्म्भ था किन्तु अब तो ध्वस्त स्थिति में। धन, अप्रिय अनुबंध, क्राईम, क्रिकेट सिनेमा के केंसर, चापलूसी, मक्कारी, धन लेकर संवाद प्रस्तुति पेड न्यूज प्रायोजित अनुबंधित सर्वे, मीडिया का चरित्र ही बन गया है। मुख्यमंत्री पेरिकर ने तो मीडिया का सत्य ही उसके सामने प्रस्तुत किया। मीडिया भी भ्रष्टाचार, धनखोरी अप्रियता, अपराध में नेताओं दल्लों, नौकरशाहों, माफिया समूहों, कारपोरेटवाद का अंग और प्रतिरूप बना हुआ है। अधिकांश मीडिया प्रतिष्ठान पॅंूजीपतियों नेताओं उद्योगपतियों व कारपोरेट जगत है। कारपोरेट जगत ही तो भ्रष्टाचार, मुनाफाधनखोरी व कारपोरेट जगत है। मीडिया भी उसी कारपोरेट जगत का हिस्सा बन चुका है। समाचार चेनल्स क्या शर्तेा के नाम से चल रहे है। क्या? मोदी गेंग से अनुबंधित अधिकांश संवाद प्रतिष्ठान है। नेताओ, दलो, माफिया, समूहों के जूतों की पालिश जुबान से अपनी सूरत देखने का चरित्र भी मीडिया का है। संवाद प्रतिष्ठान, लोगों आयडी व लेटर बेचने का गौरखधंधा कर रहे है। तथा अपने आपको बंधुवा मजदूरो से धनखोरी व अप्रत्यक्ष भ्रष्टाचार की अनिवार्यता भी थोप रहे है टारगेट के माध्यम से। किसी को भी सुव्यवस्था, सुशासन, लोकहित जन सामान्य इतिहास से सरोकार नहीं। मीडिया भी कारपोरेट सत्ताखोरों माफिया समूहों व दो नबंरियों की बंधुवा गेंग ही बन गया है। समर्पित निष्ठावान, चरित्रवादी मीडिया का तो अकाल ही हो गया है। मीडिया अब देश के कारपोरेट जगत का गुलाम व स्वंय में कारपोरेट मौलिक लेखन, चिंतन व निर्णय नदारद। मात्र नकल, धनखोरी, चापलूसी, अप्रिय अनुबंध मीडिया का चरित्र। देश के मीडिया का भी अपराधीकरण, स्वंय मीडिया प्रतिष्ठानों ने किया है। अब मीडिया के जनता, लूटेरो, डकैत, बिकाउ, षडयंत्री व संभ्रात भिखारी ही मानती है। जन निर्णय कभी झूठ नहीं हाता। निष्ठावान व समर्पित मीडिया तो परिकल्पना के दायरे में है। अधिकांश कलम एवं कैमरे का विश्वास तो सुरा, सुन्दरी, धन व सुखसुविधाओं का भोग करता हैं।


