Published On:Saturday, February 1, 2014
Posted by NJFI media
12 हजार करोड की सबसीडी खा गए, देश के सम्पन्न लोग
12 हजार करोड की सबसीडी खा गए, देश के सम्पन्न लोग
उज्जैन। देश में दो वर्ग है। सम्पन्न और वंचित। सम्पन्न 20 प्रतिशत है और वंचित 90 प्रतिशत केन्द्र व राज्य सरकारे वंचितों की उपेक्षा कररही हैं। उर्जा ईधन पर 1 लाख 31 हजार करोड की सबसीडी दी केन्द्र सरकार ने। वंचित वर्ग को महंगाई, शोषण के अति रिक्त कुछ नहीं मिला। राज्य सरकारों ने उर्जा ईधन पर 27 प्रतिशत प्रवेश कर और 25 प्रतिशत वेट कर लगा कर हर परिवार व झोपडिया तक की लूटा है म.प्र., छग व अन्य सरकारों ने। वंचित वर्ग को महंगाई, शाषण के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला। डीजल, पेटोल, रसोई गैस व घासलेट की सबसीडी का लाभ सम्पन्नों ने ही उठाया है। सरकारी रपट के अनुसार 12 हजार करोड की सबसीडी तो सम्पन्नों के उदर में समा गई और किसानों की महंगा डीजल आज भी खरीदना पड रहा है। केन्द्र व राज्य सरकार 90 प्रतिशत वंचितों व किसानों ने जी भर कर लूटा हैं। वंचित व किसान बहुआयामी लूट के शिकार हुए। केन्द्र व राज्य सरकारों ने लूट समाप्ति व सबसीडी खाने वाले सम्पन्नों पर कोई कठोर कदम नहीं उठाया। सबसीडी वाले सिंलेण्डर किसी भी आयकर दाताओं व सम्पन्नों को नहीं दिए जाए। उन्हें व्यवसायिक गैस का ही उपयोग करना अनिवार्य किया जाए। इस व्यवस्था से करोडो सबसीउी वाले सिलेण्डर बचेगे। ऐसा कठोर कदम उठाना अनिवार्य है।
डीजल व पेटोल अब सम्पन्नों की शान बन गया है। अतः पैटोल अब 70 रू लीटर करना जरूरी है। डीजल दो वर्ग में रखा जाए। कृषि व व्यवसायिक डीजल की व्यवस्था की जाए। कृषि डीजल 30 रू लीटर तथा व्यवसायिक डीजल 80 रू लीटर किया जाए। कृषि डीजल के पम्प भी अलग खेले जाए। कृषि डीजल हरे रंग का तथा व्यवसायिक डीजल पीले रंग का रखा जाए प्रत्येक वाहन में पारदर्शी ईधन टंकी हो। कृषि पर 15 हजार का दण्ड व 1 वर्ष के कारावास का दण्ड हो। किसानों की टाली जो कृषि कार्य करती है, उन्हे ही कृषि डीजल दिया जाए, व्यवसायिक टाली व्यवसायिक डीजल का उपयोग करे सभी आईल कम्पनी भंग कर, आइल फेडरेशन इन्डिया बनाया जाए व अनावश्यक स्टाफ तथा कम्पनी के नौकरशाहों के शाही खर्चे स्थानांतर व्यय नाम मात्र के स्वंय किया जाए या व्यय का दायित्व नौकरशाह बहन करे ऐसी व्यवस्था की जाए। उर्जा ईधन का दुरपयोग एवं अनुत्पादक व्यय समाप्ति हेतु जन जागृति अभियान भी चलाया जाए। जितना महत्व पानी का है उतना ही महत्व उर्जा ईधन का हैं।


