Published On:Saturday, February 15, 2014
Posted by NJFI media
अडवाणी से अपेक्षा देश की
उज्जैन। अडवाडी अनुभवी नेता है तथा भारत के महत्वपूर्ण पदां पर विराजित रहे है उन्हें देशनीति का अच्छा अनुभव है। नाजीवादी ताकतों ने उन्हें विशेष षडयंत्रों व लक्ष्य हेतु हाशिये पर डाला है उन्ही चेहरों ने, जिन्हे अडवाणी ने प्रश्रय दिया था। गुजरात , दंगों के बाद अपना राजधर्म सही ढंग से न निभाने पर अटलजी नाराज थे और उन्हें हटाना चाहते थे किन्तु गोवा बैठक में ऐसा नहीं हो पाया था। अडवाणी ने ही मोदी का बचाव किया था। वही मोदी अब अडवाणी को अपना राजनैतिक चपरासी मान रहा। संघ की मूछं का बाल अडवाणी हुआ करते थे, वही संघ अडवाणी की राजनैतिक कब्र बना रहा। नाजीवादियों का चरित्र ही ऐसा होता है।
अडवाणी को अपने ब्रम्हास्य का उपयोग करना जरूरी है। अडवाणी को संज्ञान है की देश के कितने नेता, चेहरे, संस्थाएं, लेखक, चिन्तक उद्योगपति व पत्रकार सीआयए के एजेन्ट व दलाल है अमेरिका की नियत खोरी नजर आ रही है। देश में बहुआयामी अराजकता, किसी भी माध्यम से फैलाई जाए। चुनाव 2014 में वही विजयी होगा, सिजका साथ सीआयए के दलाल व एजेन्ट देगे।
अडवाणी अपना देशधर्म निभाये और देश में विद्य़मान सक्रिय व निष्क्रिय एजेन्टस व दलालों के नाम सार्वजनिक करे। गोपनीयता शपथ की आड न ले। स्व. श्रीमती इन्दिरागांधी ऐसा साहस दिखा चुकी हैं विश्वास है की अडवाणी अपने राजधर्म का निवाहन अवश्य ही करेगे। देश की जनता उन्हें मादी को नहीं कहेगी।


