Published On:Tuesday, February 18, 2014
Posted by NJFI media
देश को सक्षम नेतृत्व कर्ता की जरूरत, कोई भी योग्य नहीं वर्तमान दोवदार
विश्व, देश, समाज, इन्सान और प्रकृति को जरूरत है सच्चे नेतृत्व कर्ताओं की जो देश समाज धरती, इन्सानों व समाजो तथा मानवीय मूल्यों की रक्षा कर सके। अन्य देशों की बजाय, हम अपने ही देश के नेतृत्व दावेदारों की असलियत जाने।
वर्तमान में जितने भी दावेदार है उनमें देश, समाज, व्यवस्था, विकास लोक उद्धार, सेवा, निष्काम कर्म, नियति श्रृगार राज व समाज कौशलता प्रशासकीय एवं समीक्षा शक्ति व गुणों का अभाव है। ये भी अपने आप में पूर्वाग्रही, अहंकारी, एक पंथी व कार्य विहीन है। सभी घिनौने स्वरूप में है और स्वंय को श्रेष्ठ होता हैं। दश का क्लर्क बनना तो दूर देश के नागरिक होने की पात्रता भी नहीं रखते है। देश,सुव्यवस्था, सुशासन सुराज, स्वर्णिम समतामूलक समाजवादी व्यवस्था प्रकृति श्रृंगार व सरक्षण लोक उद्धार व सेवा से विमुख है। सभी अनेका नेक प्रकार के मुखौटे लगा कर अपने अपने कू्रर चेहरे छुपा रहे है। जनता की भ्रमित करने के अनेकानेक युक्तियाॅं भी कर रहे है। देश व समाज हित में युक्ति की बजाय सत्ता और धन की युक्ति में ही व्यस्त है। सभी एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। विकल्प के अभाव में गिरोह के सरगना ही बता रहे है।
ऐसी परिस्थिति में अधकचरे अपरिपक्व, शाब्दिक लफाजे शातिर गुण्डों की गेंग सरगना के हाथों में देश का नेतृत्व स्वतः जायेगा ही यह देश समाज व्यवस्था, विधान और संविधान का दुर्भाग्य ही होगा। हिन्दुस्तान के हाथ से अब सौभाग्य रेखा ही गायब हो चुकी है जो शायद ही उभरे।
देश का नेतृत्व वही कर सकता है जो बहुआयामी स्वरूप मं परिपक्व हो निष्काम, कर्मी, सेवा भावी, देश लोक उद्धारक प्रकृति श्रृगारक युगीन एवं युरोपरीय सोच, दृष्टी का है। केन्द्र बिन्दु हो, दूर दृष्टिवादी एवं व्यवहारिक व रचनात्मक विकासवादी हो पूर्वाग्रही अहंकारी व सभी उच्च निन्म भाअवानाओं सेवाओं से मुक्त हो, वसुदेव, कुटुम्बकम जिसकी आत्मिक भावना व विचार हो, सर्व आकर्षण का केन्द्र हो, जिसमें कृतिमता न हो, देश, समाज, सुव्यवस्था, सुसंस्कारों, विधान, संविधान के प्रति प्रतिबद्ध हो, आत्मिक शुचितामयी हो, अति संवेदनशील व सम्यक विचारवादी हो, देश व समस्त विश्व विकास है। जिसकी भावना हो, वह अपने आप में सन्तुष्ट हो, सूफीवादी व मानवतावादी आध्यात्मक का अनुयायी हो, जिसका जीवन ही अपने आप में आदर्शी हो, विवेकवादी व्यक्ति देश नेतृत्व का उत्तराधिकारी हो सकता है। वर्तमान के भारतीय कुकुरमुत्तों रूपी दल व नेता, देश कल्पवृक्ष कभी नहीं बन सकते है। बार बार के निर्वाचन भी अर्थहीन व पागलपन ही है। मोदी, राहुल, नीतिश, मुलायम, ममता, जया, माया, अडवाणी सुषमा, सोनिया व उनके उपरोक्त मानदण्डों पर स्वंय अपनी समीक्षा करे और यदि स्वंय को योग्य पाते है तो साहस के साथ देश नतृत्व की घोषणा करे। शाब्दिक लफाजी, कृतिम, प्रायोजित छाप राजनीति अब नहीं चल सकती हैं जो स्वंय के आदर्शी एवं पूर्ण पारदर्शी है वही देश का नेतृत्व कर सकता हैं ऐसी महाविभूति अब शायद ही जन्म ले। नागनाथों और सापनाथों के फनों पर नृत्य करने का चरित्र जनता को भी बनाना होगा। तब ही भारत व जनता का भाग्योदय होगा अन्यथा अंधे व तिमिर युग में ही अपनी अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करना होगा। सभी का विवेकदीप प्रज्वलित हो और वह लूटेरों, डकैतों अपराधियों व नाजियों के गिरोह व सरगनाओं को पहचाने और हमेशा के लिए, उनका दाह संस्कार करे। एनजेएफआई का यही लक्ष्य है।


