Published On:Tuesday, February 4, 2014
Posted by NJFI media
देश को बचाओ धूर्त नाजीवादी ताकतो एवं धन विकृतियों के दैत्य से
उज्जैन। देश का अस्तित्व गौरव विधान, संविधान व्यवस्थाए अर्थ व्यवस्था आध्यात्म, संस्कार व चरित्र व जीवन यात्रा खतरे में है। देश अंधे युग में प्रवेश का रहा है और महामक्कार धूर्त, धन विकृति के दैत्य व नाजीवादी ताकते जो स्वंय को ध्र्मा, संस्कृति सभ्यता संस्कार को ठेकदार मानती हैं। किन्तु धन, जमीन और सत्ता उसका लक्ष्य है। सभी एकजूट होकर स्वंय को लोक मसीहा महाउद्धारक महादेश भक्त भारत के नव निर्माण मानवीय मूल्यों के कर्णधार जता रहे है। ये महाभ्रष्ट लिपिक और नौकरशाह देश के कितने रसातल में ले जायेगा कहना मुश्किल है। सभी सत्ता सुन्दरी के दीवाने और रसिक है। अनेकानेक आकर्षक गणवेशों टोपियों, सिद्धांतो व दलों में सभी प्रकार के महामक्कार व धूर्त सक्रिय है। हर चेहरे पर मुखौटो की परते है, सभी की ढाढ में देश का खून लंगा हुआ है हर चेहरा अपराधी है कातिल और घिनौना है।
देश के 80 प्रतिशत वंचित वर्ग, पेट की आग में झुलसा हुआ है और 20 प्रतिशत सम्पन्न उस पर राज करते हुए, अपनी सार्वभौम सत्ता स्थायी रूप से थोपना चाहता है। अनेक प्रकार की नाटक नौटंकिया करके ये मक्कार व धूर्त चेहरे अति शातिर व कुटिल चरित्रवादी सभी की आॅंखां में सुअर का बाल नजर आता है। मक्कारों के हाथ देश समाज और व्यवस्था के खून से सने है। ये गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने में माहिर है और सूरते भी बदल लेते है किन्तु उनके चाल, चरित्र चेहरे जीवन यात्रा की विधा और कला से उनका असली भेडियापन उजागर हो जाता है। 2014 का चुनाव भेडियों व जनता के बीच होना है, किन्तु ये भेडिय 80 प्रतिशत वंचितों को लोभ वाद की ठंडी मिठी गोलियों खिलाकर, अपने आपने स्वार्थ सिद्ध करने का षडयंत्र मूर्तरूप दे चुके हैं। 80 प्रतिशत जनता विवेकहीनता, लोभवाद व भडचाल के रोग से ग्रस्त हैं। वह अपने मत का महत्व व मूल्य ही नहीं समझती दिखावे व नाटक नौटंकियों पर ही विश्वास मतों की वर्षा कर देती ह। देश की की जनता अपने आप में बौद्धिक व वैचारिक रूप से अपरिपक्व है इसी कारण प्रजातंत्र गणतं, जनतंत्र भी अपरिपक्व स्थिति और आजादी बूढी होती जा रही है। राजा और रंक, उसके शव पर बैठकर शाही भोज व भोग प्रकट कर रहे हैं। यह स्थिति कब समाप्त होता हैं।
देश का प्रत्येक नागरिक अपना अपना आत्मचिंतन करे अपना सत्य जाने व स्वंय को सुधारे निश्चित ही उच्च विचार आयेगे। समग्र क्रान्ति हेतु विवेकवादी विचार व संकल्प जरूरी है। यह कार्य भूखे पेट व सच्चे उपवास से ही होगा धन मात्र साधन है उसे साध्य बना लिया गया है। इसी कारण धन विकृति दैत्यी स्वरूप में आ चुकी है। धनकुबेर व गरीब तथा आम आदमी अपनी अपनी चिंता व स्वतः सुखाय में लीन है। इसी कारण देश समाज व्यवस्था विधान संविधान आध्यात्म व जीवन यात्रा विकृतियों की हिरासत में है। सभी तरफ तिमिर है याने हम अंधे युग में जी रहे है। बहुआयामी महानिंद्रा हमारे जीवन मरण की पुस्तक व सिद्धंात हो गई है। 80 प्रतिशत वंचितों महानिंद्रा त्यागो, सच्चे उपवासी बनो अपने अपने सत्य व लक्ष्यों से साक्षात्कार करो स्वंय में विवेक दीप बनो, सभी समस्याओं का समाधान स्वतः होगा। प्रश्न पूछने की बजाय, समाधान प्रस्तुत करने का चरित्र बनाओ। नाजीवादियों व धन विकृतियों के महामक्कार दैत्यों से देश, समाज, व्यवस्था, प्रजातंत्र आजादी व गणतंत्र की रक्षा करना ही जीवन यात्रा लक्ष्य है। ये राजनतिक धन विकृतियों के भेडिये सभी को कच्चा खाना चाहते है। स्वंय भी बचो और देश को बचाओ। इसी में जीवन की सार्थकता हैं लोभतंत्र महाविनाश का मार्ग हैं।


