Published On:Saturday, February 22, 2014
Posted by NJFI media
मनरेगा घोटाला में सीबीआइ ने दर्ज की एफआइआर
लखनऊ ,राज्य ब्यूरो। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने यूपी के सात जिलों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में करोड़ों रुपये के घोटाले की एफआइआर शुक्रवार को दर्ज कर ली। रिपोर्ट में महोबा, कुशीनगर, बलरामपुर, गोंडा, सोनभद्र, संतकबीरनगर और मिर्जापुर में वर्ष 2007 से 2010 की अवधि में तैनात रहे सीडीओ, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, बीडीओ को आरोपित किया गया है। किसी को सीधे नामजद नहीं किया गया है।
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हाईकोर्ट के निर्देश के 21 दिनों बाद सीबीआइ ने आदेश पर अमल करते हुए सात जिलों में हुए घोटालों की एफआइआर अलग दर्ज की है और विवेचना का बंटवारा भी कर लिया। सीबीआइ सूत्रों के मुताबिक सोनभद्र बलरामपुर, महोबा, कुशीनगर व गोंडा के घोटालों की जांच लखनऊ स्थित सीबीआइ की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई करेगी। मीरजापुर की सीबीआइ की स्पेशल ब्रांच व संतकबीर नगर में हुई गड़बड़ी की जांच देहरादून की एंटी करप्शन ब्रांच करेगी। शनिवार से दस्तावेजों की छानबीन का कार्य शुरू हो जाएगा।
जांच इन बिंदुओं से
- बलरामपुर में 11 मदों में 181.18602 रुपए की आर्थिक चपत। दोगुने से अधिक दाम में सामान खरीदा गया।
- गोंडा में वित्तीय नियमों को दर किनार कर सामर्ग्री खरीदी गयी और आरोपितों को बचाने का प्रयास।
-महोबा में ऐसी फर्म को भुगतान हुआ जो लाइसेंसधारी नहीं थे। कैमरा खरीद में लाखों का घोटाला हुआ।
-कुशीनगर में जिन अधिकारियों के खिलाफ घोटाले के आरोप प्रथम दृष्टया दिख रहे थे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं हुई।
-मीरजापुर में सामान की खरीदारी में फर्जी कोटेशन और अभिलेख के बल पर भुगतान हुआ।
- संतकबीर नगर में गैरपंजीकृत संस्थाओं के नाम भुगतान हुआ।
- सोनभद्र में घोटाले की तस्दीक होने के बाद भी जांच नहीं हुई।
क्या था हाईकोर्ट का आदेश
31 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह ओर न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की पीठ ने याची सच्चिदानन्द गुप्ता की याचिका पर मनरेगा में गोंडा, बलरामपुर, महोबा, सोनभद्र, संतकबीर नगर, मिर्जापुर व कुशीनगर में वर्ष 2007 से 2010 के बीच हुए घोटाले की जांच करने की सीबीआइ को निर्देश दिया था। पीठ ने इसी अवधि में यूपी के अन्य जिलों में हुए घोटालों की जांच सीबीआइ के विवेक पर छोड़ दिया, लेकिन प्रत्येक तीन माह में जांच से पीठ को अवगत कराने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार को सीबीआइ की मदद करने और हर जिले में स्टेट क्वालिटी मॉनीटर सेल बनाने की हिदायत दे रखी है।
जयराम भी चाहते थे सीबीआइ जांच
केंद्रीय ग्र्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने 24 अक्टूबर 2011 को तत्कालीन मायावती सरकार को पत्र लिखकर घोटाले की सीबीआइ जांच की मांग की थी, लेकिन बसपा सरकार ने जांच का जिम्मा राज्य की एजेंसी इओडब्ल्यू को सौंपी थी। बाद में सपा सरकार बनने के बाद भी जयराम रमेश ने सीबीआइ जांच कराने का पत्र राज्य सरकार को लिखा था।
माया के अफसरों की भी बढ़ेगी मुश्किल
मनरेगा घोटाले में सीबीआइ जांच शुरू होने से मायावती सरकार में प्रभावशाली रहे अधिकारियों में कुछ की मुश्किलें बढ़ेंगी। मौजूदा सरकार में शीर्ष पद पर तैनात एक आइएएस समेत इस संवर्ग के डेढ़ दर्जन अधिकारियों से पूछताछ के साफ संकेत मिल रहे हैं। सीबीआइ सूत्रों की मानें तो वर्ष 2007 से 2010 तक यूपी में मनरेगा में 20 से 25 हजार करोड़ रुपये आवंटित हुए, जिसमें 15 से 20 फीसद तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने का भी अंदेशा है। जांच में छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक से पूछताछ की जाएगी।

