Published On:Wednesday, February 19, 2014
Posted by NJFI media
नर्मदा क्षिप्रा के नाम पर जनकोष के दुरपयोग की सरकारी नाटक नौटंकी
उज्जैन। नर्मदा शिप्रा के नाम से शिवराज की नौटंकी जारी है ग्राम उज्जैनिया में 2 करोड का व्यय हुआ, सरकार की उज्जैनिया बैठक में 56 प्रकार के व्यजन बने। बैठक के पूर्व सभी ने खूब माल चखा। जनकोष को 2 करोड से अधिक की चूना लगा। नर्मदा पानी अपलिस्ट करने पर 1500 रू प्रतिमिनीटका व्यय आ रहा।
नर्मदा लिंक के पूर्व शिप्रा घाटी न तो गहरी की गई और नहीं तटबंधों को दुरस्त किया। विद्यमान स्टाफ डेम की हालत खराब है। देवास के 350 उद्योग शिप्रा के पानी को काला कर रहे थे, वे अब नर्मदा के जल को भी काला करेगे। 350 उद्योगों में फिल्टर प्लांट एक साथ लगना मुश्किल है केबिनेट की बैठक करने वाले शिवराज बताये की कितने प्रदूषण कर्ता जेल भेजे गए है कर्ज प्रिय शिवराज तो म.प्र. के जनकोष को अपनी निजी संपत्ति मान रहे है। विज्ञापनों, करोडों की बैठक व व्यंजन स्वाद तथा अन्य अनुत्पादक व्यय कर रहे है। लाडली लक्ष्मी योजना के खाते में रूपया नहीं डाला जा रहा है। जो करोडों का व्यय उज्जैनिया में किया। यदि 20.20 हजार लाडली लक्ष्मी के खाते में डाला जाता तो परिवार खुश होते।
शिवराज को बहुमत का अंह आ गया है। वे जनकोष के दुरपयोग के अपराध भी सिद्ध हो गए है। किसानों व हर परिवार को वेट कर 25 प्रतिशत उर्जा ईधन पर वेट कर 20 प्रतिशत की वसूल कर हवा में उड रहा है। जनकोष का दुरपयोग कर रहे है। अब नर्मदा व शिप्रा को राजनैतिक मोहरा बना कर भूनाने की पहल कर रहे हैं केन्द्र सरकार खूब सहायता द रही है फिर भी बदनाम कर रहे है। शिवराज की असली चाला चरित्र व चेहरा जनता नहीं पहचान पा रही। शिवराज अपने आप में महा अपराधी चेहरा सिद्ध होगे।


