Published On:Thursday, February 20, 2014
Posted by NJFI media
बंद ससंद में तेलगाना बिल पास
उज्जैन संसद में भारी हंगामे मचे जरूरी बिल भी पास नहीं हो पा रहे बार बार संवाद स्थागित हो रही। बंद होती संसद में लेलगाना बिल ध्वनिमत से पारित हो गया तेलगाना बिल पास हुआ। आंध्र में आज से नाटक शुरू। मुख्यमंत्री रेड्डी कल त्याग पत्र देगे और नई कांगे्रस बनायेगे। तेलगाना बिल पास होन पर तेलगाना क्षेत्र में खुशी की लहर फली, लाग जश्न मनाने में जुटे एक और छोटा राज्य बन ही गया।
क्षेत्रीय तुष्टीकरण अच्छा नहीं है सभी दल धर्म संकट में थे। सभी राजनैतिक लाभ चाहते थे। मुख्यमंत्री रेड्डी ने भाजपा को अपने पक्ष में लाने का प्रयास किया नाकाम रहे अब नई पार्टी बनायेगे आंध्र दो भागों व खेमे में बटा।
तेलगाना राज्य की स्थापना चाहे हो गई हो, किन्तु छोटे छोटे राज्य की प्रथा व योजना ही गलत है। यह प्रथा देश की भावनात्मक एकता में फूट डालने वाला कुकृत्य है और विदेशी ताकतों का षडयंत्र है
संसद को छोटे राज्य समाप्ति का महत्वपूर्ण कदम उठाना है तथा देश में अचलीय शासन पद्धति और राज्यवार विकास परिषदों की स्थापना की संवैधानिक व्यवस्था करना है। अब धरती को क्षेत्रीयता के आधार पर भी बाटा जा सकता है। महा अंचलीय शासन पद्धति अनिवार्य है। छोटे छोटे राज्यों की राजनीति देश को कमजोर करने का शातिर षडयंत्र व अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कुप्रथा है सभी दल राजनीति की बजाय देशहित को महत्व दे। राष्टी सोच एकता व परिवार व कठोरता से सुव्यवस्था स्थापना चरित्र नदारद है क्या भारत को पुन दूसरी बार विभाजन की त्रासदी का शिकार बनाना चाहते है। आज राज्य मांगा, काल स्वंतत्र देश की मांगे करेगे, भारत छिन्न भिन्न होगा।
देश में अनेकता में एकता झलकती है सभी का लक्ष्य अनेकताओं को विशेषता में बदलने का होना चाहिए, किन्तु सभी भ्रमित है। और सत्ता राजनैतिक स्वार्था सुविधा भोग व बहुआयामी अराजकता को अपना जीवन लक्ष्य बनाए बैठे हैं।
समस्याओं का कोहराम, मचाने की बजाय सामाधन पर विचार जरूरी हैं भारत में छोटे छोटे राज्यों की अनिवार्यता नहीं ै। देश को पूर्व, पश्चिम उत्तर दक्षिण तथा मध्य अंचल में रेखांकित किया जाए। हर क्षेत्र जो अभी राज्य है उनके विकास हेतु विकास परिषद् की स्थापना की जाए। अचंलीय शासन पद्धति की संवैधानिक व्यवस्था की जाए, अंचलीय शासन पद्धति की संवैधानिक व्यवस्था की जाए,े उसमें दलीय नहीं, लोभप्रिय सरकार के गठन की संवैधानिक व्यवस्था हो। सभी विवाद समाप्त होगे, भावनात्मक एकता कायम होगी, अनेक प्रकार के करो से राहत मिलेगी, रोजगार के अवसर बढंगे, क्षेत्रीयतावाद समाप्त होगा, राजनैतिक कटुता समाप्त होगी, क्षेत्रवासियों का दायरा विस्तृत व विहगम होगा। राज्य की स्थिति के मान से क्षेत्र विकास परिषद बनेगी, नौकरशाहो का बोझ कम होगा।बेरियर बाद समाप्त होगा।


