Published On:Friday, February 21, 2014
Posted by NJFI media
आतंकी कौन? जनता जान
ेविदेशी एवं स्वदेशी आतंकी भारत, आजादी, सुव्यवस्था, तिरंगे और संविधान के हत्यारे है, सभी के चेहरों पर नकाबे और मुखौटे है, उनकी पहचान ही कठीन व मुश्किल है। विदेशी आतंकी तो हादसो को मूर्तरूप देने आते है, हादसो को मूर्तरूप देते है और अपनी जान गंवा देते है, किन्तु स्वदेशी आतंकी, विदेशी आतंकियों से अधिक घातक व कू्रर है। ये सभी के शवों पर बैठकर सभी को टोंच टोचं कर खाते है फिर भी देश, समाज व्यवस्था, आध्यम, सुसंस्कारों, सभ्यता आदर्शी उद्धार, सेवा के मसीहा व तारणहार बनते है। ये स्वदेशी आतंकी विभिन्न गणवेशों, टोपियों व विभिन्न स्वरूप में नजर आते है। सभी के आकर्षक गणवेश देश कफन चुराकर ही बनाये जाते हैं। सभी के वातास, परिवेश से दुंध आती है, किन्तु जनता को उनकी दुर्गंध व गुलामी पसंद है। वह स्वंय उनके संहार की बजाय स्वागत करती है, जनता आतंकियों की पहचान करने में अक्षम व असमर्थ है। जनता स्वदेशी व विदेशी आतंकियों के लोभवादी चक्रव्यूहों में फंस कर, देश, समाज व्यवस्था, विधान और संविधान की हत्या में स्वतः भागीदार हो जाती है यह स्थिति देश के लिए अधिक घातक है। इसका मुख्य कारण जन चरित्र का लोभ, स्वार्थ प्रिय, निरक्षरता स्वतः सुखायवादी भौतिकवादी एवं झूठे सिद्धातों का विश्वासक होना है। देश की जनता कर्मवादी न होकर भाग्य व चमत्कारवाद में विश्वास रखती है और अपनी आत्मा, सोच विचार व क्रांति तक बेच देती हैं।आतंकवाद वैश्विक समस्या है जो झूठी सिद्धंातवादिता, भौतिकता, सत्तावादिता, साम्राराज्यवादिता व कुष्ठित भावनाएं व विचार उसके जन्मदाता हैं आतंकवाद क्या है और आतंकी कौन इसका संज्ञान होना जरूरी है। देश, समाज, आध्यात्मक व मानवीय मूल्यों की सुव्यवस्थाओं को कुव्यवस्था में बदलना आतंकवाद होता है और जो भी व्यक्ति उपरोक्त कुकृत्य करता है वह आतंकी होता है कोई भी पंथ आतकी नहीं होता और न ही उसे आतंकी श्रेणी में रखा जा सकता है। वर्तमान में आतंकवाद का वर्गीकरण पंथ और देश रूप में किया जाता है जो उचित नहीं है। जैसे इस्लामी हिन्दु आतंकवाद किश्चवियन आतंकवाद। ये वर्गीकरण ही गलत है।
प्रत्येक देश को प्रकार के आतंकियों का सामना करना पडता है। विदेशी व स्वदेशी आतंकवादी विदेशी आतंकी तो भ्रमित होते है, धन लोभ सत्ता लोभ हेतु आतंकी बनते है और अपने कुकृत्यों को मूर्तरूप देकर, अपनी जान गवाते है, किन्तु स्वदेशी आतंकी अति घातक होते है जो देश, समाज, व्यवस्था, विधान, संविधान, आध्यात्म, आदर्श, मर्यादा व मानवीय मूल्यों के शवों पर बैठकर अपने अपने स्वार्थ सिद्ध करते है सभी देश की यही स्थिति है आतंकवाद विेदशी या स्वदेशी उन्ही के द्वारा पोषित व सरक्षित होता है ऐतिहासिक कू्ररताए, बर्बरताए झूठी सिंद्धात वादिता, धर्मवादिता साम्राराज्य वादिता, लोभवादिता सार्वभौम सत्ता स्थापना आतंकवादियों का लक्ष्य रहता है। ये सभी अपने अपने चेहरे छुपाने स्वयं को नाजियों के मुखौटों से छुपाने का उपयोग करते हैं। आतंकवाद व आतंकियों को पालते है जनता उनकी कू्ररता सहन करती है घातक परिणाम भोगने के बाद भी विदेशी व स्वदेशी आतंकवाद को समाप्त करने की पहल नहीं करती हैं।
इसी तारतम्य में भारत की स्थिति का आत्मचिंतन अनिवार्य हैं भारत का लंबा इतिहास गुलामी सहने का रहा है वह आजादी के महत्व व परिणाम को भोगने में अक्षम एवं असमर्थ ही है इसी कारण विदेशी व स्वदेशी आतंकवाद का शिकार हो रहा है। ऐतिहासिक बर्बरता झूठी, सिद्धातवादिता स्वार्थपरता के कारण, भातर ने विभाजन की त्रासदी सही और इसी दिन से आतंकवाद की काली छाया का प्रदेश हुआ, भारत और पाक में यदि जनता विवेकी, मानवतावादी, देशभक्त सच्ची आध्यात्मिक होती तो विभाजन हिंसा की स्थिति नहीं बनती है। पाक ने धर्म व कश्मीर को आतंकवाद व हिंसा से संबद्ध किया, भारत ने भी उसी अंदाज में जबाब दिया। विभाजन के जख्मों पर मल्हम की बजाय जहरीले नासू बनाया जा रहा, नफरत, हिंसा व आतंक की आग लगाई जा रही, रक्त संबंधों की भी हत्या हो रही। आतंकी दैत्यों से वरदान मांगा, उनकी पूजा की वही दैत्य अब पाक को खा रहे हैं। इस स्थिति के कारण, भारत को विदेशी आतंक की कू्ररता सहन करना पड रही है विदेशी आतंकवाद अभी भी सक्रिय है भारत सक्रमणकाल में हैं विदेशी आतंकियों से तो निपटने में सक्षम व समर्थ है, किन्तु स्वदेशी आतंकवाद और आतंकियों से निपटने मंे असमर्थ है क्यों की जनता की फौज भी स्वदेशी व विवेकहीन चरित्र के कारण स्वदेशी आतंकी उग्रवादी नक्सली, माओवाती, नेता, दल, नौकरशाह, आध्यात्मिक गणवेश, कालेधन कुबेर, संस्कृति सभ्यता के ठेकेदार देश मसीहा, उद्धारक, तारणहार उ़द्योगपति माफिया समूहों के ठेकेदार है। संसद से सडक तक उन्ही का राज और सार्वभौम सत्ता स्थापित है उनसे बाहर कोई नहीं। सभी आतंकियों के चेहरे पर मुखौटों की परते है और विदेशी ताकतों से अनुबंध भी है। चुनाव उनके प्रमुख शस्त्र है। समूचा देश, जनता व्यवस्था, धन, देशकोष, विधान, संविधान पर उनका एकाधिकार है व जनता व देश के सच्चे स्वामी है। 20 प्रतिशत सम्पन्नों का गिरोह का दश पर एकाधिकार है वही देश व जनता के मालिक है। 80 प्रतिशत वंचित जनता तो 20 प्रतिशत सम्पन्नों की बंधुवा मजदूर व गुलाम है 20 प्रतिशत ही अपने गुलामों से सत्ताधिकार व स्वामित्व प्राप्त करते है व उनकी पालकी उठाने हेतु बाध्य भी करते है, लोभवाद, भीखवाद और गुण्डावाद के माध्यम से। देश के 80 प्रतिशत वंचित भी स्वदेशी आतंकियों के मददगार है क्योंकि उनमें निरक्षरता, गरीबी, विवेकहीनता, स्वार्थ परता, लोभवादी होना, स्वंय की आत्मा, भावना, विचार व निर्णय बेचने का चरित्र होना, भाग्य व चमत्कारवाद में विश्वास रखना। अहं, पाखण्ड, झूठे सिद्धांतों में विश्वास रखना, कट्टर आध्यात्मिक होने की बजाय, सीमेन्ट क्राकिट के जंगल रूपी आराधना स्थलों के भक्त होना, त्याग निष्काम, कर्म सेवा व प्रकृति श्रृगार से पलायन कर, स्वार्थ का पुतला बनना, धन को अपना देवता व साध्य मानने का कुचरित्र रखना, स्वदेशी आतंकवाद व आतंकियों का सरक्षण देने वालो पर करता हैं। 80 प्रतिशत वंचितों का चरित्र ही हो गया है। 20 प्रतिशत सम्पन्न स्वदेशी आतंकी तो राज करेगे ही।
80 प्रतिशत महानिंदा में है उनकी चेतना सुप्त है इसी कारण स्वदेशी आतंकवाद पनप रहा है। एक वृहद जन जागरण की जरूरत हैं नेताओं सुसंस्कर व देवताओं के दलालों के दाह संस्कार बिना स्वदेशी आतंकवाद से मुक्ति संभव नहीं है। 80 प्रतिशत वंचितों, उठो, जागो, महानिंद्रा त्यागो अपने लक्ष्य पहचानो व उन्हें प्राप्त करो।

