Published On:Wednesday, February 5, 2014
Posted by NJFI media
सब्जीमण्ड़ी व मच्छीबाजार बनी संसद
राजनीति के पण्डो और गुण्डों, धन सत्ताखोर व चंदा प्रिय राजनैतिक दलों का वर्तमान स्वरूप अति घिनौना है। प्रत्येक दल, सत्ता, धन चंदे व सुख सुविधा भोंग में बंद है देश में सभी दल अपने आप में सत्ता, धन चंदा और घिनौनेपन की दुकान ही सिद्ध हो रहे है। संसद, प्रजातंत्र, गणतंत्र, सुव्यवस्था, विधान, संविधान लोकहित की कू्रर हत्या, साम्प्रदायिकता, कालेधन कुबेरो, पॅंूजीपतियों, कारपोरेट जगत का बंधुवा मजदूर बनना सभी की नीति, नियत व चरित्र। देश की जनता राजनैतिक दलो, उनके घिनौने चरित्र तथा बहुआयामीपन से उब चुकी है। जनता स्पष्ट रूप से कह रही की बहुआयामी अराजकता व अपराधी राजनैतिक दलों की कू्रर हत्या से तो सीमित तानाशाही वाला, राष्टपति शासन अच्छा है। सभी दलों का राजनैतिक पंजीयन तत्काल प्रभाव से रद्द करने की अनिवार्यता क्यों कि सभी स्वदेशी आतंकी व अपराधी के रूप में नजर आ रहे है। विदेशों में राजनैतिक दलों के नेताओं को देश के नेतृत्व कर्ता नहीं अपितु महा स्वार्थी, सत्ता व धनखोर क्लर्क ही मानते है देश में नेतृत्व का अभाव है। किसी भी दल में सर्वमान्य व देशनेतृत्व की क्षमता वाला नेता नहीं है। मोदी, राहुल, मुलायम, नीतिश व अन्यों में भी क्षमता व शक्ति नहीं है। महामहिम प्रणव दा इन मक्कार नेताओं की अपेक्षा अधिक योग्य नजर आते है। मोदी तो देश, समाज व एकता भंजक व नाजीवादी मुखौटा है। राहुल में अनुभव व नेतृत्व का अभाव है। प्रजातंत्र के मंदिर व नज आस्था केन्द्र को सब्जी मण्डी व मच्छी बाजार बनाने तथा राजनीति के अपराधीकरण के अपराधी है सभी राजनैतिेक दल देश की संसद, प्रजातंत्र का पावन मंदिर और जनविश्वास व आस्था को कन्द है, किन्तु राजनीति के पण्डे, गुण्डे, राजनीति माफिया, समूह, पॅंूजीपति, कालेधन कुबेर तस्कर, अपराधी चेहरे, धन, सत्ता, सुविधा भोगी सांसद और 20 प्रतिशत सम्पन्नों के बंधुवा मजदूर राजनैतिक दल, स्वदेशी आतंकी स्वरूप में नजर आ रहे है। देश की सभी व्यवस्था आतंकी स्वरूप में नजर आ रहे है। जनता कह रही की वर्तमान सांसद के सांसदों को प्रतिनिधित्व तो दूर, देश में जीने तक का अधिकार नहीं है जन निर्णय 100 प्रतिशत सही है। संसद में 377 सांसद तो करोडपति है उनमें से 77 अपराधी भी है। ऐसी शेष दलीय दिमागी जनता स अभिशप्त है याने ससद राजनीति के पण्डों व गुण्डों का केन्द्र है। 80 प्रतिशत वंचितों के कल्याण, सेवा और स्वर्णिम समातमूलक, समाजवादी व्यवस्था की कल्पना व परिकल्पना भी मुर्खता है। मोदी, राहुल, सोनिया, नीतिश, माया, ललिता, ममता, अडवाणी, सुषमा, जेटली, कारत, मुलायमसिंह व अन्य सभी राजनतिक सत्तावादी नौटंकी ही कर रहे है।
संसद की कार्यवाही पर प्रति मिनिट 2.50 लाख खर्च होता है, किन्तु सफेद हाथियों को जनकोष की परवाह ही नहीं। वे तो महास्वार्थी, धनखोर, सुविधा भोगी, दलीय जडता के शिकार स्वतः सुखाय में रत। उन्हें 80 प्रतिशत वंचितों, सुव्यवस्था गणतंत्र से कोई सरोकार ही नहीं। जनता कह रही की देश विधान और संविधान के हत्यारे सरकारी वर्दी में नजर आ रहे है संसद में। इन घिनौने चेहरों व दलों को अपने कुकमोें पर तनिक शर्म भी नहीं आ रही है। जनता देश के राजनैतिक दलों को धिक्कार रही है। किसी मं भी देश नेतृत्व की क्षमता नहीं। इसी कारण, भारतीय नेताओं को विदेशों में धनकुबेरों के महाभ्रष्ट कलर्क और बंधुवा मजदूर ही माना जा रहा है। स्व.श्रीमति इंदिरा गांधी व अटलजी ने उपरोक्त धारणाओं को खण्डित अवश्य किया था।
वर्तमान के सभी दल, सासंद और जनप्रतिनिधि जन विश्वास योग्य नहीं है। सभी अपने अपने चेहरों पर अनगिनत मुखौटे लगाते है। जनता को भ्रमित करते है सभी दल व नेता विशेष प्रकार के राजपक्षी ही नजर आ रहे है और कडी सुरक्षा व्यवस्था में रहना उनकी मजबूरी है। अब जनता का मिजाज चरित्र व व्यवहार बदल चुका है। वह शेष राजपक्षियों तमाचे जतो चप्पलो, सडे अण्डे, टमाटर व पत्थरों से स्वागत करने का चरित्र बना चुकी है। विशेष राजपक्षी चाह जितने सुरक्षा घेरे में रहे, कोई न कोई आजाद भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू व अशपाक उल्ला बन कर विशेष राजपक्षियों को सबक सिखा ही देगा। हरियाणा कांड इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
देश के विशेष राजपक्षियों, सफेद हाथियों, पॅंूजीपतियो, कालेधन, कुबेरों, कारपोरेट जगत के मुखौटे व बंधुवा मजदूरो, नेता व सभी दल सर्तक ही रहे, अब जनता की मिजाज गर्म है उसे सभी दलों की डीएनए रपट का पूर्ण अध्ययन भी हो चुका है। भूखी घडियाले बन, देश, समाज आदमी, व्यवस्था, जनकोष, विधान और संविधान को खूब खाया है। अभी भी भूखी घडियाने नजर आ रही है। संसद और विधान सभाओं को सब्जीमण्डी मच्छीबाजार और बूचडखाने वाले विशेष सुरक्षित व अन्य राजपक्षियों को जनता अपने उदर में समायेगी। अब 80 प्रतिशत वंचित जनता चैतन्य व जागृत हो चुकी है 20 प्रतिशत स्वदेशी आंतंकियों का संहार उसका लक्ष्य हैं।


