Published On:Friday, February 7, 2014
Posted by NJFI media
संघ व भागवत की प्रतिष्ठा गिरी
उज्जैन। असीमानंद के दो वर्ष पूर्व के साक्षात्कार ने, राजनीति में खलबली पैदा कर दी। असीमानंद ने आतंकी हादसों के द्वारा 109 लोगों को मौत का उपहार दिया था। पकडाये जाने पर मौत का उपहार देने का क्रम थमा। मुस्लिमों की हत्या मुख्य लक्ष्य था। हिन्दु आतंक की स्थापना मुख्य लक्ष्य था। असीमानंद ने भगवा वस्त्रों में यह कुकृत्य किया व सुसंस्कार के नाम पर संघ व बजरंग दल के लोगो से सम्पर्क बनाये रखा। हिन्दुत्व के नाम पर संघ ने भी असीमानंद को महत्व दिया है।
असीमानंद का खुलासा, महोन भागवत व उनके बीच की चर्चा है। अीसमानंद ने कहा की मोहन भागवत से चर्चा हुई थी व सहयोग भी मांगा था, किन्तु मोहन भागवत ने स्पष्ट इंकार किया था इंकार स्पष्ट नहीं था। संघ अपनी भागीदारी उनके साथ नहीं रखना चाहता था, किन्तु मोहन भागवत ने यह कहा कि तुम करो हम तुम्हारे पीछे से साथ हैं। वार्ता संवाद दो वर्ष पुराने है जिनका कोई रिकार्ड भी नहीं है। ऐसी स्थिति में असीमानंद जो कह रहे है वह पूर्ण सत्य है इसमें शंका की स्थिति बनती है। असीमानंद चतुर चालाक भी हैं असीमानंद पूरा झूठ बोल रहे है कहना गलत है असीमानंद के खुलासे से संघ की बौद्धिकता गडबडाई है उसने असीमानंद के साक्षात्कार को ही फर्जी बताया, जबकि अंगे्रेजी पत्रिका कारवा ने चार बार असीमानंद का साक्षात्कार लिया जो सत्य हैं।
संघ को चाहिए कि वह असीमानंद के खुलासे की जाॅंच सीबीआय से करवाने की बात कहे, किन्तु संघ ऐसा नहीं कर रहा। यह बडी भूल हैं। सीबीआय जाॅंच में सब कुछ स्पष्ट हो जायेगा, कौन सच और कौन झूठ है। कभी कभी अति उत्साह में कुछ बाते कह देना भी आत्मघाती हो जाता हैं और संघ व मोहन भागवत के साथ भी ऐसा ही हुआ। बसपा, कां्र्रग्रस व अन्य दल भी असीमानंद खुलासे की सीबीआय जाॅंच की मांग कररही है। जब संघ, मोहन भागवत व असीमानंद के बीच कोई सबंध वार्ता, संवाद या भेंट की स्थिति ही नहीं है तो सीबीआय जाॅंच से क्यों कतराना। मामला गंभीर होता जा रहा है। संघ को सीबीआय जाॅंच की त्वरित पहल करना चाहिए। संघ को अपनी प्रतिष्ठा बचाना जरूरी है। मोहन भागवत स्वंय में विवेकवादी है, वे विवेकी कदम और निर्णय त्वरित लेगे। संघ को कोकणी ब्राम्हणों के सिद्धांतों व निर्णयों पर चलाने की बजाय सनातन धर्मी वेदांती व सूफीवादी संस्कृति, सिद्धांतों व निर्णयों पर चलाने की अनिवार्यता हैं।


