Published On:Saturday, February 8, 2014
Posted by NJFI media
फर्जी प्रसार संख्या वाले समाचार पत्र
उज्जैन म.प्र. में फर्जी प्रसार संख्या बताने वाले समाचार पत्रों की भरमार है जो केन्द्र व राज्य सरकारों से फर्जी प्रसार संख्या के आकार का 55 से 250 रू प्रति सेमी प्रतिकालम का धन वसूलते हैं। जो समाचार 700 से लेकर दस हजार किालते है उन्होंने अपनी प्रसार संख्या 45 हजार से 65 हजार प्रतिदिन बता रखी है। प्रसार संख्या का रेकार्ड भी विद्यमान है।
प्रसार संख्या की नियति सत्यापन की व्यवस्था डीएव्हीापी तथा प्रदेश जनसम्पर्क संचानलय व जन सम्पर्क कार्यालयों में नहीं है। वर्षो मं विशेष शिकायतों के बाद चैकिंग और सौजन्यवादी के कारण शातिर अपराधों पर शातिर ढंग से लीपापोती हो जाती है। कुछ सामचार पत्र तो ऐसे है जो मात्र 300 प्रति ही निकालते है व डी.एव्ही.पी. व राज्यशासन के भारी भरकम विज्ञापन छाप कर धन कमाते हैं।
डी.ए.व्ही.पी. व राज्य शासन फर्जी प्रसार संख्या वाले समाचार पत्रों के निर्यात चैंकिग व भौतिक सत्यापन की तुरंत व्यवस्था करे। सी.ए. के प्रसार संख्या वाली रपट व्यवस्था उचित नहीं है। स्थानीय जनसम्पर्क कार्यालय द्वारा प्रस्तुत रपट ही डीएव्हीपी व राज्य सरकारे मान्य करें। मामला अतिशातिर व रोचक है। एनजेएफआई को अनेक प्रकार के रोचक रहस्य प्राप्त हुए है उन्हें र्साजनिक किया जायेगा खोज जारी।
यह हाल अधिमान्यता के सरकारी पट्टे गले में टागने की प्रतिस्पर्धा का है। अधिमान्यता के खेल भी निराले है अधिमान्यता के खेल और षडयंत्रों का पर्दाफाश एनजेएफआई करेगा। अनेक चैनल्स की टीआरपी पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे है। कुल मिलाकर धनखोर संवाद पालिका की प्रतिष्ठा ही धूर्मिल कररहे हैं।
प्रसार संख्या की नियति सत्यापन की व्यवस्था डीएव्हीापी तथा प्रदेश जनसम्पर्क संचानलय व जन सम्पर्क कार्यालयों में नहीं है। वर्षो मं विशेष शिकायतों के बाद चैकिंग और सौजन्यवादी के कारण शातिर अपराधों पर शातिर ढंग से लीपापोती हो जाती है। कुछ सामचार पत्र तो ऐसे है जो मात्र 300 प्रति ही निकालते है व डी.एव्ही.पी. व राज्यशासन के भारी भरकम विज्ञापन छाप कर धन कमाते हैं।
डी.ए.व्ही.पी. व राज्य शासन फर्जी प्रसार संख्या वाले समाचार पत्रों के निर्यात चैंकिग व भौतिक सत्यापन की तुरंत व्यवस्था करे। सी.ए. के प्रसार संख्या वाली रपट व्यवस्था उचित नहीं है। स्थानीय जनसम्पर्क कार्यालय द्वारा प्रस्तुत रपट ही डीएव्हीपी व राज्य सरकारे मान्य करें। मामला अतिशातिर व रोचक है। एनजेएफआई को अनेक प्रकार के रोचक रहस्य प्राप्त हुए है उन्हें र्साजनिक किया जायेगा खोज जारी।
यह हाल अधिमान्यता के सरकारी पट्टे गले में टागने की प्रतिस्पर्धा का है। अधिमान्यता के खेल भी निराले है अधिमान्यता के खेल और षडयंत्रों का पर्दाफाश एनजेएफआई करेगा। अनेक चैनल्स की टीआरपी पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे है। कुल मिलाकर धनखोर संवाद पालिका की प्रतिष्ठा ही धूर्मिल कररहे हैं।


