Published On:Wednesday, February 5, 2014
Posted by NJFI media
संसद में स्वदेशी आतंकियों के कुकृत्य
उज्जैन। जो भी व्यक्ति देश की सुव्यवस्थाओं को कुव्यवस्थाओं में बदले, वह चाहे विदेशी हो या स्वदेशी आतंकी ही माना जायेगा। संसद प्रजातंत्र का मंदिर व जनभावनाओं व आस्थाओं का केन्द्र है। उसमें सुव्यवस्था प्रतिपल रहना ही चाहिए। यह सर्वमान्य सिद्धंात व भावना है। 5 फरवरी 2014 को 15 वी लोकसभा का अंतिम सत्र शुरू हुआ। दिवगंतों को श्रृद्धाजलि दी गई। प्रश्नकाल की घोषणा अध्यक्ष ने की तो संसद में हंगामे शुरू हो गए और संसद के दोनों सदन राजनीति के पण्डो, गुण्डां के आतंक का शिकार हो गए। संसद मंदिर नहीं, सब्जी मण्डली और अच्छी बाजार स्वरूपी हो गया है। अध्यक्ष ने सुव्यवस्था व शांति की गुहार की किन्तु सभी व्यर्थ गई। अराजकता व कुव्यवस्था के कारण दोनों सदनों को दोपहर तक के लिए स्थागित करना पडा। अध्यक्षों को हंगामेबाज दलों और सांसदों की सूची चुनाव आयोग को प्रेषित करना चाहिए और हंगामेबाज सांसदों को ताउम्र चुनावी प्रक्रिया के लिए अयोग्य तथा उनके दलों का राजनैतिक पंजीयन तत्काल प्रभाव से स्थायीरूप से रद्द करने की अनुशंसा चुनाव आयोग को भेजना चाहिए। ऐसी कठोर कार्यवाही के बाद ही संसद की गरिमा व सम्मान कायम रहेगा, प्रजातंत्र बदनामी से बचेगा व जनकोष का दुरपयोग व अपव्यय समाप्त होगा।
देश की प्रजातंत्र प्रिय जनता को राजनैतिक आतंकियों का आतंक व अराजकता, पंसद व स्वीकार नहीं है। महामहिम संसद एवं प्रजातंत्र की गरिमा को अक्षव्य बनाने रखने हेतु कठोर कदम उठाये।जनता उनके साथ है। राजनैतिक दलों का आंतकवाद समाप्त होना चाहिए।
देश की प्रजातंत्र प्रिय जनता को राजनैतिक आतंकियों का आतंक व अराजकता, पंसद व स्वीकार नहीं है। महामहिम संसद एवं प्रजातंत्र की गरिमा को अक्षव्य बनाने रखने हेतु कठोर कदम उठाये।जनता उनके साथ है। राजनैतिक दलों का आंतकवाद समाप्त होना चाहिए।


