Published On:Monday, March 3, 2014
Posted by NJFI media
बडी खबरे 03.03.14
ढाका। भारत कल लगातार दूसरी हार कमजोर गेंदबाजी मुख्य कारण था।
लखनउ। उ.प्र. मं भाजपा राजनैतिक खल।
कानपुर। कांगे्रस का चुनाव प्रचार शालीनता पूर्वक हो रहा।
लखनउ। मोदी का धन सहयोगी कौन खुफिया जाॅंच जरूरी।
गुवाहाटी। अगम फस्ट मोर्चे मं रहेगी। पंथ निरपेक्षता मुख्य आधार।
उज्जैन। सीआयए के एजेन्टस व दलालों के नाम सार्वजनिक करने से कतरा क्यों रहे हैं। अडवाणी और देवगौडा।
कोलकोटा। ममता के आगे मोदी बहुत फीके। ममता जनता की व मोदी पॅंूजीपतियों उद्योगपतियों व कारपोरेट जगत के प्रतिनिधि।
दिल्ली। कारपोरेटस, उद्योगपति व कालेधन कुबेर, देशद्रोही परिवेश में। सभी पर रासुका के तहत कार्यवाही जरूरी।
दिल्ली। लंबित विधेयकों को अध्यादेश बनोन की प्रक्रिया, राष्टपति रोके।
भोपाल। अब 7 हजार करोड का नया कर्ज फिर लेगी सरकार।
इंदौर। कालेधन कुबेर के यहा छापे। माना टावर, जमीनों, रियल स्टेट कम्पनी में निवेश। अनेक फर्जी कम्पनीजके राज खुले।
दिल्ली। कोहरे की चपेट में दिल्ली। रेल व वायु सेवा प्रभावित।
दिल्ली। रिटेल एफडीआय पर जेटली ने मोदी को नकारा। भाजपा के द्वार बंद हैं। मोदी का बयान फेकू है। मोदी उन्माद, भाजपा के गले की हड!डी बनाी।
सिवनी। सिमी का गढ बना। सिवनी अनेक चेहरे सक्रिय।
गुना। समूचे प्रदेश में प्राकृतिक कोश का कोहराम। सरकार भी विचलित। हवाई सेर्वेक्षण में भी अनेक प्रभावित क्षेत्र छुटे।
लखनउ। गपोडी व झूठेले मोदी की हवा निकली। फरे बास की तरह आवाज हुई दावा 5 लाख का था एक लाख भी नहीं जुटे।
मुंबई। मेघा पाटकर ने अवैध निर्माण के खिलाफ मोर्चा खोला। धरन पर बैठी।
लखनउ। पॅंूजीपतियों, कारपोरेट जगत की ंदी हवा ोि तूफान बताया मोदी ने। धनछाप अभियान को सुनामी तक बताया। तूफान व सुनामी विध्वसंक व नरसंहारी होते है जनता को पसंद व स्वीकार नहीं।
उज्ैन। मोदी की 275 सभाएं सम्पन्न कुल कितना खर्च हुआ, मोदी एवं भाजपा बताए। चुनाव आयोग भी कठोर कदम उठाये। प्रत्येक सभा में 2 से 16 हजार किराये के श्रोता भेजे जाते रहे है। प्रत्येक श्रोता पर कितना व्यय मोदी बताय। इतना धन कहा से आया। यह भी सवाल हैं।
नागपुर। संघ का तोता रिटेल एफडीआय के पक्ष में। भाजपा व संघ ने पहल विरोध क्यों किया था।
दिल्ली। सभ दल बताये चुनावी सभाओं रैलियों व अन्य कार्यो हेतु चंदा कहा से आया व किस किस ने दिया।
उज्जैन। मोदी अपनी 275 वी रैली व सभाओं, सुरक्षा, किराए के श्रोता पर कितना व्यय किया, हिसाब दे।
उज्जैन। चुनाव 2014 प्रजातंात्रिक व लोकतांत्रिक चुनाव नहीं। कारपोरेट व पॅंूजीतंत्री चुनाव हो गया है।
दिल्ली। मीडिया पॅंूजीपतियों कारपोरट व नाजीवादियों के मुखौटे मोदी व उसके रिमोट अंबानी का बंधुवा मजदूर क्यों बन रहा हैं।


