Published On:Friday, March 28, 2014
Posted by NJFI media
एक और विभाजन की कुशंका
उज्जैन।महा हिन्दुस्तान स्वार्थी तत्वों एवं घिनौनी राजनीति के कारण अति छोटेस्वरूप में नजर आ रहा है किन्तु राजनीति आध्यात्म धर्म व सभयता व सुसंस्कारों के गुण्डे और पण्डे उसे और छोटा करने के षडयंत्र रच रहे हैं एतिहासिक बर्बरताओं को आधार बना कर आतंक के भूतको जन्म दिया अयोध्या में अब काशी व मथुरा की हवाला देकर नया घिनौना साम्प्रदायिकता जहर फैलाया जा रहा है। यही जहर देश में फैल रहा है। ऐतिहासिक बर्बरताओं का युग व कल्प समाप्त हो चुका है अब तो नव सोच की जरूरत है सभी पंथों के आराधना स्थल नमन योग्य है क्योंकि ईश्वर के सैनिकों के विश्राम गृह है उन्हे देखन मात्रसे आत्म सन्तुष्टी मिलती है। उपरोक्त विहगम विचार व दृष्टि में किसी का विश्वास नहीं है। सीमेन्ट क्रांकिट के जंगलों को आराधना स्थ्ल आध्यात्मकव पंथ मानने की नादानी के कारण ही सम्प्रदायिकता पनपती ै।


