Published On:Saturday, March 22, 2014
Posted by NJFI media
पत्रकार का जारी है पुलिसियां उत्पीड़न सोशल मीडिया से भी मांगी थी मदद
वाराणसी : इंडिया लाइव २४ टीवी क्राइम कण्ट्रोल इंडिया के हवाले से इस समाचार को पहले भी कर चूका है प्रकाशित परन्तु भ्रष्टाचारियों के हाथो की कठपुतली बन चूका है यह देश आप किस से इंसाफ की उमीद कर सकते है यहाँ संत्री से लेकर मंत्री तक सब के सब भ्रष्टाचारी है पुलिस अपराधी को सच्चा इंसान भले न बना सके मगर सच्चे इंसान को अपराधी बनाना पुलिस महकमा बखुबी जानती है। यह हम नहीं कहते यह बात बया करती है भदोही के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी की उत्पीड़नात्मक पुलिस कार्यवाही। झूठ के बुनियाद पर चंद दिनों में गुंडाएक्ट, जिलाबदर कर पूरी गृहस्थी लूटवाना यह अपने-आप में बताने के लिए पर्याप्त है। गुस्साइल बिलरिया खंभा नोचे यह कहावत सटिक बैठता है जिलाधिकारी भदोही रहे अमृत त्रिपाठी व एसपी अशोक शुक्ला पर 25 नवम्बर 2012 को मुहर्रम के दिन भड़की हिंसा में अपनी नाकामी से खिसियाए डीएम व एसपी निर्दोष युवक पर खुद लाठियां बरसाने लगे जिसे वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। भदोही में महाशिवरात्रि के दिन अलसुबह हुए विस्फोट और कोतवाल संजयनाथ तिवारी की लापरवाही की खबर छापने के बाद पुलिस ने सारी सीमाएं लांधकर श्री गांधी के खिलाफ बिना किसी अपराध के 18 मार्च 2013 को गंुडाएक्ट की रिपोर्ट एसपी अशोक शुक्ल के जरिए रिपोर्ट डीएम अमृत त्रिपाठी को प्रेषित की। अपनी नाकामी की खबर छापने से क्षुब्ध तत्काल जिलाधिकारी भदोही अमृत त्रिपाठी ने सुरेश गांधी का पक्ष सुने बगैर 25 मार्च 2013 को नोटिस दी। जिसके बाद पीडि़त पत्रकार ने इसकी शिकायत रजिस्टर्ड पत्र से मुख्यमंत्री, डीजीपी, प्रमुख गृह सचिव से लगायत वाराणसी आईजी जोन से की। मगर किसी ने इस मामले में कोई कार्यवाही नही की जिसके कारण 9 अप्रैल को जिलाबदर की कार्यवाही करते हुए पुलिस ने मुहल्ले में डुगडुगी बजाकर मुझे गुंडा व अपराधी कहलवाई। जिलाबदर की कार्यवाही पर हाईकोर्ट का स्टे व पुलिस की फर्जी मुकदमे में जमानत के बावजूद कोतवाल संजयनाथ तिवारी व उसके हमराहियों ने सरेराह पकड़कर सुरेश गांधी को बाल उखाड़ते हुए पीटा पैर में कील ठोक दी और एक और फर्जी मुकदमा भी लाद दिया। मुलतः जौनपुर के गोपालापुर श्री गांधी पिछले 16 सालों से अयोध्यापुरी कालोनी स्टेशन रोड भदोही के किराए के मकान में रहकर पत्रकारिता करते है। वह प्रातःकालीन लीडिंग अखबारों के साथ-साथ आज तक न्यूज चैनल के भदोही ब्यूरो चीफ है। उनके पास मौजूद अखबरों के हजारों बाइलाइन छपी खबरों के अलावा वीडियों फुटेज व अन्य घटनाओं समेत दूरसंचार कार्यालय, इनकमटैक्स, बैंक एलआईसी के अभिलेखों आदि में अंकित व पूर्व के आरोपों में विभिन्न न्यायालयों व जनसूचना विभाग से जारी कार्डों आदि प्रमुख साक्ष्य न सिर्फ पत्रकार बल्कि उस पते पर रहने के लिए पर्याप्त आधार है मगर भदोही पुलिस ने अपनी काली करतूत छिपाने के लिए श्री गांधी को पत्रकार नहीं होने का ब्यान सहित हाईकोर्ट के स्थगन आदेश व जिला न्यायालय से मिली जमानत आदेशों को भी खारिज कर दिया। इतना ही नहीं जिन तीन मुकदमों को आधार बनाकर गुंडाएक्ट व जिलाबदर किया गया है उसमे खुद पुलिस ने आरटीआई रिपोर्ट में मुकदमों को खत्म होने की बात कही गयी है। मुहर्रम के दिन भड़की हिंसा, टे?न पर पत्थराव, मस्जिद में पुलिस द्वारा तोड़-फोड़ की घटना को प्रशासनिक अफसरों की ओर से जारी बयान में कह दिया हैं कि तोड़-फोड़ आदि की घटना हुई ही नहीं है जो हुआ था उसे आपस में सलटा लिया गया हैं। श्री गांधी की पुलिसयां उत्पीड़न के पीछे मुल कारण यह बताया जाता है कि प्रशासनिक लापरवाही की घटना सहित सरकार गठन के दौरान जुलाई 2012 कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की मौजूदगी में बिना किसी इजाजत विजय मिश्रा जेल के बाहर आकर कार्यक्रम में सरीख होना, माफिया अतिक अहमद की मौजूदगी, अवैध बालू खनन, सैकड़ों के निर्माण में धांधली आदि की कवरेज समाचार पत्र में खबर के रूप में प्रस्तुत करना ही गांधी के लिए अभिशाप बन गया व बाहुबली विधायक सहित पहले से चिढ़े जिला प्रशासन व पुलिस के निशाने पर आ गये। सत्ता पक्ष का विधायक होने के नाते वह प्रशासन की किरकिरी से क्षुब्ध जिलाधिकारी व पुलिस अधिक्षक भी सुरेश गांधी को दुश्मन की तरह देखने लगे। उसके कानूनी हथकंडे से शुरू हुआ पत्रकार सुरेश गांधी का उत्पीड़न बदस्तूर जारी है। पीडि़त पत्रकार पर गुंडाएक्ट, जिलाबदर व धमकी देने तक के मुकदमे लाद दिए गये। जबकि बाहुबली विधायन विजय मिश्रा पर लूट, हत्या, डकैती, अपहरण, फिरौती, गुंडाटैक्स सहित 54 मामले दर्ज है लेकिन उसके विरूद्ध कोई कार्यवाही इसलिए नहीं हो रही क्योंकि सत्ता प्रमुखों का उस पर हाथ बताया जाता हैं। सत्ता गुरूर इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा हैं कि उसकी दबंगई के आगे कानून बौना पड़ने लगा है। उसकी काली करतूते व प्रशासनिक की खामियां मीडिया सूर्खिया न बने इसलिए पत्रकार पर पुलिसियां कहर जारी है। यह पूरा मामला यह इंगीत करता है कि सपा सरकार बाहूबलियों को सफेदपोश पहनाकर गुंडागर्दी की खुलेआम छुट दे रखी हैं। वहीं स्वयंसेवी संगठनों ने मुख्यमंत्री सहित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल को सुरेश गांधी के मामले में निष्पक्ष जांच कराने का पत्र लिखा है। उसके बावजूद भी आज तक कहीं से सुरेश गांधी को न्याय नही मिल रहा है। बावजूद इसके पुलिस लगातार सुरेश गांधी की पत्नी सहित गवाहों को धमकी दे रही है।


