Published On:Friday, March 14, 2014
Posted by NJFI media
पेड न्यूज पर भ्रमित है चुनाव आयोग
उज्जैन। पेड न्यूज प्रिय है ई और पी मीडिया। चुनाव आयोग भी पेड न्यूज पर भ्रमित है नेताओं व दलों का मीडिया मैनेजमेंट भी पेड न्यूज है जिसके दर्शन व्ही चनल्स व समाचार पत्रों में प्रतिदिान हो रहे है। चुना आयोग क्या घृतराष्ट व विवेकहीन है जो उसे नजर नहीं आ रहा। मोदी की सभाआं का सीधा प्रसारण बार बार पूरे दिन बताना, मोदी के पक्ष में चर्चाएं व उपलब्धी का प्रंशसा विज्ञापन, समाचार पत्रों में पूरे पूरे पृष्ठ के स्वप्रंशसा व अपनी उपलब्धि जताने। ये भ्ीा तो पेड न्यूज ही है। मोदी की प्रंशसा बार बार उसे बताने तथा अन्यों की उपक्षा मोदी चुनाव आयोग व रहस्य भी चेनल्स से रखते हैं।
पॅंूजीपतियें, उद्योगपतियों एवं कारपोरेट जगत का एकाधिकार है। आजतक टीवी, सहारा समय व अन्य चैनल्स तथा बडे बडे समाचार व मध्यम समाचार पत्र, सभी कारपोरेटस क ह। कारपोरेट का विश्वास भ्रष्टाचार घोटाले कुव्यवस्था, मुनाफे में ही रहता है और हर ढंग से अपना लक्ष्य प्राप्त करते हैं। मीडिया दलो, नेताओं एवं सरकारों से अनुबंध करती है मीडिया मैनेजमेंट के नाम पर। जो भी दल नेता व सरकार मीडिया मैनेजमेंट करती है मीडिया उसे आसमान चढाता है उसे देश मसीहा जताता है उसके दूसरे पहलु को छुपाता हैउ.प्र. गुजरात छग व राजस्थान की सरकारे, मोदी इसके प्रत्यक्ष प्रमाण है। केजरीवाल के साथ पहले मीडिया था, बाद में मोदी के मोटे माल के कारण, अपनी आस्था बदली, समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों के सत्य की छपी मीडिया ने सच्चाई तक नहीं जानी।
अब तो हर समाचार पेड न्यूज बन कर सामने आता है। चेनल्स व समाचार प्रतिनिधि सच्चे पत्रकार की बजाय मीडिया प्रतिष्ठान के कमीशन एजेन्टस के रूप में ही कार्य करते है। लोकरल चेनल्स भी धन लेकर ही समाचार प्रसारित करते है। पेड न्यूज, मीडिया की आत्मा हो गई है उसे समाप्त करना मुश्किल है क्योंकि नेताओं व कारपोरेट जगत का शातिर षडयंत्र हैं।


