Published On:Saturday, March 1, 2014
Posted by NJFI media
रसायनविद आद्यदेव शिव
आद्यदेव शिव सृष्टि के संरक्षक, सृजक, संधारक एवं संहारक है। कम लोगों को पता होगा की आद्यदेव शिव स्वंय में रसायनों का केन्द्र भी है। वे महा रसायन भारती भी है उनके त्रिशूल में त्रिरसायन विद्यमान है उनके मष्तिष्क में ज्वाला फेकने वाला रसायन है जो तीसरे नेत्र से अग्निवर्षा करते है। चन्द्र में शीतलता रसायन निरंतर सृष्टि में बिखरेता रहता है उनकी जटाओं में विशेष रसायनों की संग्ररक क्षमता है। शिव के डमरू की ध्वनि से भी विशेष रसायन की वर्षा होती है जो ध्वनि तरंगों को प्रभावित कर नए नए परिणाम देती है दैत्यों को भस्मीभूत कर उनकी रसायनिक भस्मी को भी अपने शरीर पर लेप करना भी शिव का विशेष रसायनिक प्रक्रिया है जो अन्र्तध्यान होने सर्व विहिता व शारीरिक बनता प्राप्ति की प्रकिया है। शरीर पर भुजंगों को धारण करके जहर जलन निरोधक रसायन प्राप्त करने की प्रक्रिया है। शरीर में विशेष रसायन द्वारा जहर के कुप्रभाव को समाज कर निष्र्प्रभाी बनाने व ठोस स्वरूप में परिवर्तित करने वाले रसायन भी शिव के शरीर में विद्यमान है।
आद्यदेव शिव के रसायनी तत्वों से परिपूर्णता का संज्ञान व उनके परिणामों पर गहन शोध की जरूरत है।
दलजीत सिंह गुरूदत्ता
अध्यक्ष- धार्मिक उत्सव समिति एयरपोर्ट भोपाल।
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