Published On:Friday, March 14, 2014
Posted by NJFI media
क्र्लकनुमा राष्टीय नेतृत्वकर्ताओं का अप्रिय सत्य
उज्जैन। देश प्रजातंत्र, अर्थव्यवस्था सुव्यवस्था, सुराज, सुशासन व जीवन विधा और कला संकट में है। लोभाद मुक्तवाद, सबसीडीवाद, स्वार्थवाद धनवाद और सत्तावाद उपरोक्त महापतन के मुख्य कारण है। चुनाव महा मक्कार धूर्तो के शातिर षडयंत्र व शस्त्र हैं इन मक्कार चेहरों पर मुखौटा की मोटी परते हैं समयानुसार सभी अपने अपने चेहरों पर नए नए मुखौटे लगाते है। मोदी, भागवत सोनिया राहुल पंवार मुलायम, लालू यादव, नीतिश ममता, जयललिता माया अडवाणी, सुषमा, शिवराज तोमर, वसुंधरा व रमन। सभी के चेहरों पर मुखौटे है।
जनभावनाओं का सम्मान कोई नहीं करता, झूठे सिद्धांतों, अहं, पाखण्ड पूर्वाग्रह, अपराध व घिनौनेपन में सभी का विश्वास है। सत्ता सुन्दरी सुविधा भोग धन सभी का लक्ष्य है। सच्चे उपवास, आध्यात्मक, जनसत्य व स्वंय के सत्य जानने से भी परहेज । देश में अपनी मनमर्जी की व्यवस्था थोपने व कानून बनाने की घृष्टता कोई भी दूध का धुला नहीं, फिर भी स्वंय को देश, लोक, विकास एवं उद्धार, मसीहा जता रहे है। ये तथा कथित मसीहा व तारणहार देश समाज व लोक रक्षक नहीं अपितु भजंक हैं। ये ही सभी चेहरों स्वंय रंजन में विश्वास रखते है देश, समाज व व्यवस्था रजन में इनका विश्वास ही नहीं है। दूसरी तरफ जन विश्वास भी सच्चे आध्यात्मक निष्काम कर्म, सेव उद्धार, सर्व सम्मान, त्याग सुसंस्कार व विवेकवादिता में नहीं। सभी धन विकृति की हिरासत में है। राजा और रंक का चरित्र ही विकृत तो देश महाशक्ति कैसे बने। भारत, माता, देश, व्यवस्था सुसंस्कार आदर्श, मर्यादा व मानवीय मूल्यों के सरक्षण् व रक्षा की मुक्ति सिखाने वाल भी कोई नहीं। देश का आध्यात्मक पालिका भी बहुआयामी विकृति की हिरासत में हैं।


