Published On:Tuesday, April 1, 2014
Posted by NJFI media
आत्म चिंतन द्वारा विवेकदीप प्रज्वलन व सत्य से साक्षात्कार, सच्ची उपासना
उज्जैन। चेत्री नवरत्रि खडी नवरात्रि में आद्यशक्ति माॅं कीअर्चना पूजा व आराधना की जाती है। मंदिरों में भीड लगती है उपवास की नौटक नौटंकी होती है चमत्कार की घटनाए होती है स्थिति बडी रोकच ही है। आद्य शक्ति कीसच्ची पूजा, अर्चना व आराधना अति सरल ह सच्चे मन से उपवास, भूखे रहना नही अपितु ध्यानावस्ता में आद्य शक्ति का स्मरण कर आत्म चिंतन करना आत्म चिंतन की अग्नि से स्वंय का विवेक दीप प्रज्वलित करना तथा निष्काम कर्म, सेवा, लोक उद्धार नियति श्रृगांर निष्कपट ईमानपूर्वक जीवन की विधा और कला को अति सुन्दर व श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लेकर उन्हें मूर्तरूप देना ही आद्य शक्ति माॅं की सच्ची पूजा, अर्चना व आराधना है।
आडम्बर पाखण्ड दिखावे काधर्म माॅं को पंसद व स्वीकार नहीं है। आद्यदेव माॅं उसी में वास करतीहैं।
प्रत्येक व्यक्ति स्ंय का आत्मचिंतन करे व निर्णय ले की वह आद्यशक्ति का सच्चा साधक है या पाखण्ड में जी रहा है आ़़द्यशक्ति माॅं को उनका स्मरण यज्ञ अति प्रिय है। प्रतिपल स्मरण यज्ञ करते है या नहीं निर्णय करों।
आडम्बर पाखण्ड दिखावे काधर्म माॅं को पंसद व स्वीकार नहीं है। आद्यदेव माॅं उसी में वास करतीहैं।
प्रत्येक व्यक्ति स्ंय का आत्मचिंतन करे व निर्णय ले की वह आद्यशक्ति का सच्चा साधक है या पाखण्ड में जी रहा है आ़़द्यशक्ति माॅं को उनका स्मरण यज्ञ अति प्रिय है। प्रतिपल स्मरण यज्ञ करते है या नहीं निर्णय करों।


