Published On:Tuesday, April 8, 2014
Posted by NJFI media
मर्यादा पुरूषोत्तम का पृथ्वीलोक भ्रमण निराश होकर लौटे
उज्जैन। मर्यादा पुरूषोत्तम राम ने जल समाधि ली थी। राम व उनका दरबार अमर रहे। वे दरबार सहित जन्मदिन का उत्सा देखने पृथ्वीलोक में प्रकट हुए। अयोध्या व अन्य जगहोंका भ्रमण किया। उन्ेहे राम का नाम बजाय राम मंदिर की ध्वनि व राजनीति नजर आ रही थी। ये क्या जन्म दिन मनायेगे वे मंदिरों में गये वहा जनमा नदारद मिली राम ने पुजारी से पूछा उदस क्यो होे। व बोल पडा रामजन्मोत्सव व्यापार में घाटा गया 2 जार लगाये थे 500 कीचढेेोत्री आई 1500 का कर्जदार हो गया। राम ने व्यापारी दूकानदारों, भिखारियों से भी चर्चा की तो उत्तर मिला की मर्यादा पुरषोत्तम राम धन थेोडी देते है, व्यापार करेगे झूठ बोलेगेमौल और तोल में मारेगे धन मिलेगेा। उसका परिवार का जिव्हा स्वाद मिटेगा। हम तो धन राम के भक्त महावीर से राम ने कहा तुम भक्त हो मेरे जन्म की खुशी तुमरे मदिरों में भी नहीं। महावीर ने सिर झुकाया व कहा प्रश्न मेरा पुजारी धन लोभी हो गया है, कोई बडा यजमान नहीं मिला इस कारण आपका जन्मोत्सव नहीं मनाया व मंदिर ने ताला लटकाया। रामदरबार आदमी की कुनीति व स्वार्थी चरित्र से नाराज होकर दरबार सहित अन्र्तध्यान हो गए व भविष्य में पृथ्वी लोक में न आने का संकल्प लिया। श्रीराम मर्यादा पुरूषोत्तम है उनका संकल्प अपने आप में मर्यादा है सत्ता, राम धनराम की बस्ती में वे क्या आये।


