Published On:Wednesday, April 2, 2014
Posted by NJFI media
भाजपा और चन्द्रबाबू नायडू के बीच विचित्र खेल
उज्जैन। तेदपा नेता चन्द्रबाबू कहा प्रधानमंत्री का ख्वाब देख रहे थे किन्तु स्थित अनुरूप नीं थी। आंध में कांगे्रस बिखरी। जगन व रेड्डी कागे्रस भारी हुई। चन्द्रबाबू को भाजपा ने अपना आदेश पालक बंधुवा माना, किन्तु नायडू में भाजपा को अंगूठा दिखाया। भाजपा ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लडने की घोषणा की। सत्ता के दलाल सक्रिय हुए और कुछ ही समय में नायडू व भाजपा के बीच फिर तालमेल हो गया। सपा के दलाल धनरूपी अलाद्धीन का चिराग लेकर नायडू के पास गए थे। नायडू की इच्छा पूर्ण हुई और वे समझौता कर बैठे। अंबानी, अदनानी व कारपोरेट जगत के दलाल बहुत चतुर है, वे सबको खरीदने में माहिर है। एजनएफआई पर उनक जादू नहीं चल पाता है क्यें की उसका सुरक्षा कवच सत्य,ईमान व चरित्र हैं।


