Published On:Sunday, April 13, 2014
Posted by NJFI media
शादी भी करूंगा, पी.एम. भी बनुगा राहुल का सकल्प
शादी भी करूंगा, पी.एम. भी बनुगा राहुल का सकल्प
उज्जैन। राहुल गांधी ने का की में शादी भी करूंगा और पी.एम. भी बनूा सकल्पी होना अच्छी बात है शादी के योग्य राहुल है, चुनाव बाद शादी करेगे, उनका एक संकल्प पूरा होगा। पी.एम. बनने का दूसरा संकल्प मृग घृण्णाके समान है राहुल गांध्ी में पी.एम बनने की क्षमता है किन्तु योग्यता एवं अनुभव नहीं है यह शाश्वत सत्य है राहुल ांधी का अटलजी जैसा राजनैतिक गुरू भी नहीं जैसा स्व. राजीव गांधी के राजनैतिक गुरू अटलजी थे। राजीव गांधी ने नाम कमाया। राहुल गांधी में वाक्तव्य शैली का अभाव है राजनैतिक अपरिपक्वता है, दूर दृष्टी व सामाजिक बोध् का भी अभाव है अतः वे प्रधानमंत्री अभी नहीं बन सकते। पंथ निरपेक्ष व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाये, उसके साथ रह कर जननौका बन कर कार्य करें। उनकी सोच अच्छा है किन्तु उसे मूर्तरूप देने वाले चेहरों का अभाव है मोदी भी अपरिपक्व, पूर्वाग्रही अहंकारी, शाब्दिक, लफाज, झूठेला व गपोडी चेहरा है वह भी प्रधानमंत्री बनने योग्य नहीं है वर्तमान अडवाणी, जयललिता, ममता एंटोनी नीतिश, मुलायम, शरद पंवार, मोदी से लाख गुणा बेहतर हैं। राहुल गांधी 80 प्रतिशत वंचितों के जुबान के स्वर बनें। मोदी तो पॅंूजीपतियों, कालेधन कुबेरों उद्योगपतियों व कारपोरेट जगत का दल्ला हैं। मोदी महा मक्कार कुटिल व षडयंत्री चेहरा हैं।
राहुल 50 प्रतिशत फेलै बहुआयामी संयम स्वस्थ चिंतन सेवा एवं युवाभक्ति को रचनात्मक विकास में संलग्न कर 2019 में राहुल अपना संकल्प मूर्तरूप में देख सकेगे।
उज्जैन। राहुल गांधी ने का की में शादी भी करूंगा और पी.एम. भी बनूा सकल्पी होना अच्छी बात है शादी के योग्य राहुल है, चुनाव बाद शादी करेगे, उनका एक संकल्प पूरा होगा। पी.एम. बनने का दूसरा संकल्प मृग घृण्णाके समान है राहुल गांध्ी में पी.एम बनने की क्षमता है किन्तु योग्यता एवं अनुभव नहीं है यह शाश्वत सत्य है राहुल ांधी का अटलजी जैसा राजनैतिक गुरू भी नहीं जैसा स्व. राजीव गांधी के राजनैतिक गुरू अटलजी थे। राजीव गांधी ने नाम कमाया। राहुल गांधी में वाक्तव्य शैली का अभाव है राजनैतिक अपरिपक्वता है, दूर दृष्टी व सामाजिक बोध् का भी अभाव है अतः वे प्रधानमंत्री अभी नहीं बन सकते। पंथ निरपेक्ष व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाये, उसके साथ रह कर जननौका बन कर कार्य करें। उनकी सोच अच्छा है किन्तु उसे मूर्तरूप देने वाले चेहरों का अभाव है मोदी भी अपरिपक्व, पूर्वाग्रही अहंकारी, शाब्दिक, लफाज, झूठेला व गपोडी चेहरा है वह भी प्रधानमंत्री बनने योग्य नहीं है वर्तमान अडवाणी, जयललिता, ममता एंटोनी नीतिश, मुलायम, शरद पंवार, मोदी से लाख गुणा बेहतर हैं। राहुल गांधी 80 प्रतिशत वंचितों के जुबान के स्वर बनें। मोदी तो पॅंूजीपतियों, कालेधन कुबेरों उद्योगपतियों व कारपोरेट जगत का दल्ला हैं। मोदी महा मक्कार कुटिल व षडयंत्री चेहरा हैं।
राहुल 50 प्रतिशत फेलै बहुआयामी संयम स्वस्थ चिंतन सेवा एवं युवाभक्ति को रचनात्मक विकास में संलग्न कर 2019 में राहुल अपना संकल्प मूर्तरूप में देख सकेगे।


