Published On:Friday, April 4, 2014
Posted by NJFI media
सत्ता के भेडियों की दरदिंगी और खूनी खेल
उज्जैन। 25 वर्ष पूर्व हुए शर्मनाक हादसे का सत्य सामने आया तो सत्ता के भेडियों, दरिदों वखून की होली खेलने वालोंने इसे षडयंत्र बतायाकर कब तक झूठके आकाश में उडाने भरते रहोगे और अपने को तारणहार जताते रहोगे। देश विभूतियों पर अपनी मुहर लगाते हो स्वार्थ सिद्धि के बाद उन्हें कचरे में डाल देते हो क्यों घिनौनापन करते हो स्वामी विेकानंद को अपना आदर्श मानते हो और उन्हीं के सिद्धातों विचारों व निर्णयों की कू्रर हत्या करते हो, सत्ता सुन्दरी के लिए लोभवाद का प्रसाद बाटते हो आराधना स्थल ध्वस्त करते हो और अपने सत्य को षडयंत्र बताते हो भगवान ने सार सत्य स्वीकार। स्वामी विवेकांनद ने स्पष्ट कहा की सभी पंथों के आराधना स्थल पूज्यनीय है क्येंकिवे ईश्वर सैनिकों को आराम गृह हैउन्हें नमन करने से आत्मा सन्तुष्टी मिलती हैं।सब कुछ जानेते हो फिर भी आराधना स्थलों के ध्वस्त करने के षडयंत्र रहते हो ऐतिहासिक बर्बरताओं को आधार बनाते हो खुद सुरक्षित रहतेहो,भाई को भाई से लडवते हो। और सत्य सामने आ जाये तोउसे षडयंत्र बतात हो। झूठ, अफवाह व घिनौने पन के विकृत चेहरा ेंअब से दोहरापन नहीं चलेगा। सच्चे व कट्टर आध्यात्मिक तिलक बना रहे हो। अपने हंगामे में सभी नंगे हैं जनता भी सुसस्कार वादी, सर्व सम्मानक चरित्र खो चुकी है। स्वयं व्यक्ति, कौम, व्यवस्था व प्रजातांत्रिक सामाजिक मूल्यों को गालीदेना,उसका भी चरित्र हो गया हैं। दोष् किसे दे, हर चेहरा तो कातिल और हत्यारा नजर आता है स्वंय मवाली नजर आता है फिर भी स्वंय को देशवादी सामाजिक, उद्धरक, मसीहा, तारणहार और देवदूत जताता है। लाल रक्त की जगह सफेद खून वाला प्राणी बनता है और उसे परिवर्तन कहता है अब देश में देशवाद, संस्कारवाद आदर्श, मर्यादा, सम्मानवाद, आदर्श, मर्यादा का दाह संस्कार हो चुका हैऔर मवालीवादी संस्कृति फैलारे है। हमारी आत्मा हमेंधिक्कारती है किन्तु उसे हम अपना गर्व व सम्मान मानते हैं। हम वास्तव में शैतान हैं।


