Published On:Saturday, April 26, 2014
Posted by NJFI media
कौन बनेगा प्रधामनंत्री
उज्जैन। चुनाव 2014 प्रजातंत्र राष्टीय सामाजिक, आध्यात्मिक सुसंस्कारिक एवं मानवीय मूल्यों पर आत्म घाती प्रहार हैं। चुनव 2014 में लोकविश्वास नहीं क्यों की जहाॅं 3 हजार करोड खर्च होना था वहा 30 हजार करोड खर्च हो रहे, चुनाव में कालाध्न व अनैतिकता के नंगे नाच हो रहे। 300 करोड, 1.33 लाख लीटर शराब तथा करोडों के डग्स पकडायी। ईवहीएम मशनों की खराबी व तकनीक से छेडछाड हुई। हर नेता दलीय नेताओं ने अपनी जुबान से जहर वषा की आरोप प्रत्यारोपों की झडी लगाई। मोदी व उनकी गेंग इस दिशा में आगे रही, देश को तोडने आराजकता, हिंसा व गृह युद्ध भडकाने की पहल की। विदेशी ताकतों के माध्यम से हजारों करोड देकर चुनाव प्रचार कराया, मीडिया को खरीदा, प्रायोजित रैलिया सभाएं व कार्यक्रम किए, झूठेवादों के विज्ञापन दिए, क्यो क्या नहीं किया। देश के साम्प्रदायिक सद्भाव व भावनात्मक एकता को समाप्त करने की पहल की। संघ ने भी खूब षडयंत्र रचे। सत्ता अपहरण के गिरो रचे, पॅंूजीपतियों कालेधन कुबेरों उद्य़ोगपतियों कारपोरेट नगे माफिया समूह एवं संगठन 80 प्रतिशत वंचित जनता को नचाने वाले मदारी बन कर सत्ता की खरी खाना चाहते हैं। मतदान के 6 चरण पूर्ण 3 चरण शीघ्र पूर्ण होगे। 178 स्थानों के चुनाव होना बाकी हैं।
कौन बनेगा प्रधानमंत्री यही प्रश्न जनता के मन मष्तिष्क में। प्रधानमंत्री हेतु चर्चित नाम में मोदी, राजनाथ, अडवाणी राहुल एंटोनी नीतिशकुमार ममता, जयललिता पंवार, माया, राजनाथसिं, मुलायमसिंह नाम चर्चित हैं। मोदी प्रधानमंत्री कभी नहीं बन सकते। भाजपा केा 272 स्थानों पर जीत संभव नहीं मोदी के नाम पर सहयोगी दल भी तैयार नहीं। राजनाथ व अडवाणी के नाम पर सहमति संभव। भाजपा बडा दल बन कर उभरेगा अनुभव हीन राहुल हथियार डाल चुके हैं। नीतिश के पस प्रधानमंत्री बनने का संख्या बल नहीं। अतः कांगे्रस जनता परिवार को समर्थन देगी भाजपा को नीं। ममता, जया व माया के पास 90 का संख्या बल रहेगा। जयललिता का समर्थन कर रही ै माया भी जयललिता के पंथ में जायेगी। मुलामसिं भी संख्या बलमें पीछे हैं। वे घोषणा कर चुके है कि जनता परिवार में जिसके अधिक सांसद होगे वही प्रधानमंत्री होगा। वामपंथी भी जनता परिवार को समर्थन दे रे है। कांगे्रस जनता परिार व वामपंथी के पस संख्याबल 300 के आस पास आता हैजब की बहुमत हेतु 272 की जरूरत हैं। स्पष्ट है जनता परिवार तीसरे मोर्च का ही प्रधानमंत्री बनेगा और जयललिता की स्थिति भी मजबूत है।। सोनिया भी महिला प्रधानमंत्री की पक्षधर हैं। भाजपा में भी दो फाड हो सकी हैं। अडवाण्ी का नाम भी बन रहा हैं। राजनाथ भी प्रचासरत हैं। पंथ अंडवाणी भी पंथनिरपेक्षता की बाते बता रहें हैं।
त्रिशंकु स्थिति ही रहेगी अतः माममि लोकप्रिय सरकार का गठन कर उत्तरदायी स्थायी सरकार का गठन करके देश में न राजनैतिक अभिसमय स्थापित कर सकते हैं।



