Published On:Wednesday, May 7, 2014
Posted by NJFI media
दाउद भारत आने को बेताब
उज्जैन। दाउद उम्र की ढलान पर है कबतक बोझा ढोते जिंदा रहे। उसका आत्म उसे कचोरती है मादरे वतन की मिट्टी के स्वर उसे प्रेरित करते है उसकीसेवा हेतु यी हालदाउद का है सब कुछकिया विश्व का धन कुबेर बना लंबी गेंग भी हैआतंक के चरम पर पॅंहुचाया अनेक जघन्य अपराध भी किए पत्येक जीवधारी प्रत्येक पल मृत्यु के निकट जाता है व सदैव ही बौद्धिक, मानसिक शारिरीक रूप से हमेशा अंशात रहता है वह आत्मिक शांति चाहता है जो नियति चक है दाउद भी अब भारत आना चाहता हैं। ताकि आत्मिक शांति के साथ जीवन यापन कर सके। दाउद आत्म समर्पण करना चाहता है और उसेएकऐसे नेता व दल की जरूरत है जो उसे सरक्षण दे सके। य काय वही नेता कर सकता है। जिसका अपराधिक रेकार्ड है, माफिया समूहों से उसके संबंध ो और सरकार में उसकी बात को मान्यता मिलती हो व उसका दबाब भी पडता हो ।
जनता ऐसे नेता की परिकल्पना करे व भारत सरकार को नाम भी सुझाये। दाउद स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करे बजाय किसी नेता को मध्यस्त बनाने के। दाउद भारत आये आत्म समर्पण करे अपराधिक जीवन से दूर रहे अपार संपत्ति से जनसेवी काय करें, अस्पताल व स्कूल बनवाये। गरीबों की मदद करे सुसंस्कार ही उसके सच्चे साथी एवं सरक्षण होगे। अब जीवन की सांसे बहुत कम शेष है अपने जीवन के ढलान पर मानव व देशेसवी कार्य करे, भारत सरकार व जनता सभी अपराध माफ करेगी व अच्छे देश व समाजसेवी के रूप में सम्मान देगी।

