Published On:Thursday, August 14, 2014
Posted by NJFI media
विधान, संविधान, तिरंगे, व्यस्था, संस्कारो तथा सामाजिकता के हत्यारे कोन?
आजादी की ६७वी वर्षगाठ पर सभी का हार्दिक अभिनन्दन| आज दिन आत्मचिंतन तथा आत्मविवेचन कादिन दिन भी |माँ भारती के सामने हम अपराधी की तरह खड़े हें | हम सब स्वार्थी,विश्वासघाती,कुसंस्करी, ओर
राष्ट्र व समाज के प्रति उदासीन व लापरवाह भी| कोहराम, घिनोनी राजनीति, धनखोरी,कुसंस्कार,झूठ,स्वार्थ
अंधविश्वास, शातिर अपराध ओर शान के साथ अपना सत्य, चरित्र,आत्मा तथा ईश्वर को खाना हमारी नीति|
ये हें हमारा अपना अप्रिय, नग्न सत्य| देश मे विधान,संविधान,तिरंगे,व्यवस्था,सामाजिकता,आदर्श,सत्य
तथा सभी मूल्यों की सरेआम हत्या हो रही ओर मोन हें क्यों?उतर देने का साहस तक नही|
हमारा सोंच की हम पापियों का मान चंगा हें यहा क्यों की हड्डिया डुबाने को गंगा हें यहाँ| |इस कारण हम
हर प्रकार के अपराधो को उन्माद पूर्वक करते हें|हम भी विधान,संविधान,तिरंगे सुव्यवस्था,सामाजिकता
आध्यत्म तथा अपनी आत्मा की हत्याके अपराध करने मे नही हिचकते|इस परिवेश मे आजादी व देश
केसे जिन्दा रह सकता हें|हम सुधरने को तय्यार ही नही, देश भक्ति का कोहराम मचाते हें|सच तो यह हें
की हमारेअपने चरित्र, व्यवहार, नीति,नियतओरध्येय ही धोहरे तथा दोगाले हें|
आजादीपर्व परअपनी आत्मा से पूछे की हम आदमी हें या देत्या

