Published On:Saturday, August 16, 2014
Posted by NJFI media
कृष्णत्व स्वरूप श्रीकृष्ण के संदेश
मे किसी को मुक्ति नही देता
मे कृष्णत्व हु, कोटि कोटि ब्रहामंड़ो का महानायक हु | मे ही सभी मे व्यापत हु,जीवन और मरण भी मे ही
मे किसी को मुक्ति नही देता |मेरा संदेश हें की निष्कामकर्मी बनो,,लोक उद्धारकबनो,सेवा करो,नियति कहाshrngarakबनो| ऐसा करने पर ही मेरे आभा मण्डल के अणु कण बन सकते हो | स्वामी विवेकानंद ने भी साफ की मे मुक्ति नही चाहता | सभी वृत्ति त्याग कर निवर्ती वादी हो कर जीवन यात्रा पूर्ण करो |
महातपस्वी के सामने कृष्ण प्रकट हुए तथा वरदान मागने को कहा, तपस्वी ने मुक्ति का वरदान माँगा,
श्री कृष्ण ने इंकार कर दिया| तपस्वी नाराज से लगे ,श्रीकृष्ण ने कहा, आप तपस्वी हें किंतु आप स्वार्थी हें क्यों
की, आपने तपस्या की मुक्ति हेतू, जो स्वार्थ हें |मे आपको फिर धरती पर भेजता हु ,वहा जाकर सेवा करो,लोकउद्धार की भावना से जीवन यात्रा पूर्ण करो,मेरे आभा मण्डल के अणु बनने की पात्रता आयेगी
तपस्वी को आपनी भूल का अहसास हुआ|
I naver crave salvation, but active life to work for sewa,lokudhhar, nayti shrangar

