Blogger Widgets
Headlines
Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

विशाल जलाभिशेक यात्रा निकली

Posted by njfimpnews | Wednesday, August 13, 2014 | Posted in

डग
यात्रा में बम बोले षंभू भोलेनाथ, जय जय षिवषंकर, के नारे से कस्बा गुंजायमान हो गया, यात्रा का जगह जगह फूलो की वर्शा कर स्वागत किया गया, जगह जगह यात्रा में पद यात्रीयों के लिए अल्पाहार कराया गया, पदयात्रा दोपहर में कायावर्णेष्वर महादेव मंदिर क्यासरा पहुंची जहां पदयात्रियों ने भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर जलाभिशेक किया, और देष में भाईचारा बने रहने की कामना की ।
दूर दूर से पहुंचे श्रद्धालु: डग झालावाड मार्ग पर स्थित कार्यावर्णेष्वर महादेव अपनी प्राकृतिक सौन्दर्यता को लेते हुए श्रद्धालुओं का अटूट श्रद्धा का केन्द्र बना , कार्यावर्णेष्वर महादेव मंदिर क्यासरा में सुबह से हरियाली अमावस्या व षनि अमावस्या पर के अदभूत दिन पर भोलेनाथ के जलाभिशेक के लिए कतारे लगी नजर आई, वही राजस्थान मध्यप्रदेष के कई जगहो से कावडियों का जत्था जलाभिशेक करने के लिए पहुंचा, तो महिलाऐं व छोटी छोटी बालिकाऐं सैकडो किमी से पैदल चलकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने के लिए पहुंची इस मौके पर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए वही महिलाओं के लिए महिला कांन्स्टेबल की व्यवस्था की गई । तो स्काउट गाईड के मोतीराम के नेतृत्व स्काउट के छात्रो ने सुबह से ही जीतोड मेहनत कर व्यवस्था में अपना पूरा सहयोग दिया ।



- विष्व हिन्दु परिशद, बजरंग दल द्वारा हर वर्श की भांति गायत्री षक्ति पीठ से क्यासरा कायावर्णेष्वर महादेव मंदिर तक निकलने वाली जलाभिशेक कलष पद यात्रा निकली । पद यात्रा डीजे व बैण्ड के साथ कस्बे के गंगधार दरवाजा, नीम चौक, कछहरी, गणेष चौक, बुधवारिया दरवाजा, बस स्टैण्ड होती हुई कायावर्णेष्वर महादेव मंदिर क्यासरा के लिए रवाना हुई । यात्रा में कस्बे व आस पास के ग्रामीणा क्षैत्रों से हजारो की संख्या में महिलाओं, बालिकाओं, ने अपने सर पर विषेश साज सज्जा कर कलष लेकर महोदव का जलाभिशेक करने के लिए रवाना हुए ।

तपस्याओं की लगी लड़ी

Posted by njfimpnews | | Posted in ,

डग 8 अगस्त: जैन ष्वैताम्बर मूर्ती पूजक संघ द्वारा पदमप्रभु भगवान मंदिर उपाश्रय में चातुर्मास के चलते पूज्य साध्वी श्रीरत्न ज्योती श्रीजी म.सा. की षिश्या श्रीअक्षय ज्योतीजी एवं निराग ज्योती जी म.सा. के सानिध्य में तपस्याओं का दौर चल रहा है तपस्याओं में साकली तेले किए जा रहे है जो चातुर्मास के पहले दिन से चातुर्मास के अंतिम दिन तक चलते रहेगें वही अठठ्ई तप में वर्षा मेहता, सागरमल जैन ने किए जिन्हे पारणा कराया गया वही तपस्वियांे को पूज्य साध्वीजी ने आशिर्वचन दिए, वही गणधर तप के अंतर्गत 11 तपस्वियों के तप चल रहे है, आगामी 12 अगस्त से नवकार मंत्र की नो दिवसीय आराधना की जाएगी और 15 अगस्त से 17 अगस्त तक तीन बडी पूजन आयोजित की जाएगी ।
चातुर्मास के चलते रोजना जैन मंदिर उपाश्रय में पूज्य साध्वीजी म.सा. के प्रवचन चल रहे है जिसमें तप एवं तप के महत्व के बारे में बताया ।

रक्षाबंधन की सबसे प्राचीन कथा -

Posted by njfimpnews | | Posted in ,

 “येन बद्धो, बलि राजा दान विन्द्रो महाबलम।
                                              तेन-त्वाम अनुबन्धामी, रक्षे मां चला मां चलम।।“

अर्थात मैं यह रक्षा सूत्र बांध रही हूं, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार लक्ष्मी जी ने असुरराज बलि को बांधा था और अपनी रक्षा करने का वचन लिया था। इसी समय से रक्षा सूत्र बांधने का नियम बना जिसे आज भी बहन अपने भाई को कलाई पर बांधकर परंपरा को निर्वाह कर रही है। कथा इस प्रकार है कि प्रहलाद का पुत्र और हिरण्यकश्यप का पौत्र बलि महान पराक्रमी था। उसने सभी लोकों पर विजय प्राप्त कर ली। इससे देवता घबरा गए और विष्णु जी की शरण में गए| विष्णु जी ने बटुक ब्राह्मण का रूप धारण किया और बलि के द्वार की ओर चले।
असुरराज बलि विष्णु जी के अनन्य भक्त थे तथा शुक्राचार्य के शिष्य थे। जब बटुक स्वरूप विष्णु वहाँ पहुँचे तो बलि एक अनुष्ठान कर रहे थे। जैसे कि हे ब्राह्मण मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ। बटुक ने कहा मुझे तीन पग भूमि चाहिए।
महाराज बलि ने जल लेकर संकल्प किया और ‘तीन पग‘ भूमि देने को तैयार हो गए। तभी बटुक स्वरूप विष्णु अपने असली रूप में प्रकट हुए। उन्होंने दो पग में सारा ब्रह्माण्ड नाप लिया तथा तीसरा पग रखने के लिए कुछ स्थान न बचा। तभी बलि ने अपने सिर आगे कर दिया। इस प्रकार असुर को विष्णु जी ने जीत लिया और उस पर प्रसन्न हो गये। उसे पाताल में नागलोक भेज दिया। विष्णु जी बोले मैं तुम से प्रसन्न हूँ मांगों क्या मांगते हो? तब बलि ने कहा कि जब तक मैं नागलोक में रहूंगा आप मेरे द्वारपाल रहें। विष्णु जी मान गए और उसके द्वारपाल बन गए। कुछ दिन बीते लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को ढूंढना आरंभ किया तो ज्ञात हुआ कि प्रभु तो बलि के द्वारपाल बने हैं। उन्हें एक युक्ति सूझी।
श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन उन्होंने बलि की कलाई पर एक पवित्र धागा बांधकर उसे भाई बना लिया। बलि ने भी उन्हें बहन मानते हुए कहा कि बहन मैं इस पवित्र बंधन से बहुत प्रभावित हुआ और बोला मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहता हूं बहन! मांगो? लक्ष्मी जी को अपना उद्देश्यपूर्ण करना था, उन्होंने बताया जो तुम्हारे द्वारपाल है, वे मेरे पति हैं, उन्हें अपने घर जाने की आज्ञा दो। लक्ष्मी जी ने यह कहा कि ये ही भगवान विष्णु हैं। बलि को जब यह पता चला तो उसने तुरन्त भगवान विष्णु को उनके निवास की और रवाना किया।

njfi

___________________________

MAHAAPOR V NIGAM COMMITIONER KE PUTLE KO DI FAANSI .

Like Us On Facebook

    व्यूअर संख्या

    web site hit counter