गौवंश की रक्षा का सही मार्ग
डग। समूचे देश में गौवध का कुकृत्य जारी है। बाबर जैसे कट्टर सुन्नी सुलतान ने गौवंश वध पर प्रतिबंध लगाया था। बाबर नामा में उल्लेख है, किन्तु आजादी के बाद भी गौवंश वध जारी है, उसे प्रतिबंधित नहीं किया जा रहा है। गौ रक्षा गौशाला के नाम पर राजनीति व धनखोरी खुले आम हो रही हैं। गौपालक भी जर्जर गायों को पानी के दाम बेच देते है, उन्होंने यह भी पता है कि इन गायों का वध होगा। गौरक्षा के नाम पर अनेक चेहरे धनखोरी कर रहे है। गौशालाओं में अवैध परिवहन की शिकार गायों की बदरबार भी होती है। गौरक्षा के नाम पर रोटियाॅं सेकी जा रही है। पुलिस से भी साठगांठ के प्रमाण मिले है अपराधी चेहरेो के खिलाफ गवाही न देने हेतु भी धन लिया जाता है। घिनौनेपल चरम पर है। गौवंध प्रतिबंधित किया जाये, ऐसा करने वाले को आजन्म कारावास दिया जाये। कोई भी गोपालक जर्जर व बूढी गायों को नहीं बेचे। प्रत्येक जिले में वृद्ध सरकारी गौशलाएं हो, जनता उसका संचालन करे। गौरक्षा हेतु प्रत्येक परिवार अपनी स्थिति हेतु हर प्रकार का सहयोग दे। कठौर दण्ड व्यवस्था व जनता की जागरूकता से ही गौवध रूकेगा।



