प्राकृतिक आफतों के बाद भी गेहॅंू की बम्फर आवक हो रही
उज्जैन। अवंछित वर्षा व ओलावृष्टि का खूब कोहराम मचा। म.प्र. सरकार ने 2 जार करोड की सहायता राशि स्वीकारी केन्द्र ने 495 करोड स्वीकृत किए। शिवराज मंत्री नेता व अफसरों ने मगरमच्छी आॅंसू बहाये। आनन फानन में नुकसानी की सर्वे रपट प्रस्तुत की। हजारों करोडों का नुकसान बताया।
इतना होने के बावजूद मण्डियों में गेहॅंू की बम्पर आवक हो रही हैं जब भारी नुकसान हुआ था फसले चैपट हो गई थी बम्पर उपज कहा से आ रही क्या गरीबों का गेहॅंू किसानों के नाम से आ रहा। मामला अतिरोकच है। सरकारी सर्वे के मानसे 30 प्रतिशत उपज ही आना थी किन्तु 95 प्रतिशत उपज आ रही है यह भी अपने आप में चमत्कार है लगता है नुकसानी का सर्वेे व आकलन परिकल्पनीय ही था। वर्षा के कारण उपज की चमक प्रभावित हुई है न की उपज नष्ट हुई है भारी ओलावृष्टि वालेकुछ क्षेत्रों में अवश्य नुकसान हुआ है म.प्र. व उसके नौकरशाहों की झूठ व लापरवाही उजागर हुई।


