Published On:Friday, November 29, 2013
Posted by NJFI media
महाकाल मंदिर में काले भुंजगों
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर मंदिर में अनियमितता, धनखोरी, धोखाधडी के काले भुंजग महाकाल को घेरे हुए है और दक्षित कर रहे हैं महाकाल मंदिर समिति भी विवादों व शंका के घेरे में है। महाकाल मंदिर के नाम से 14600 बीघा जमीन है, वह कहा कहा है, किसके पास है, उससे कितनी आय होती है खुलासा नहीं है। चाॅंदी व स्वर्ण के कितने बिल पत्र, नाग व छत्र है स्वर्ण व रजत कवर से रूद्राक्ष माला कहा है, सारा माल कहाॅं रखा है इसकी जानकारी प्रशासन के पास नहीं है। 16 हजार रूपये प्रतिमाह पर 16 पण्डित हैं उनमें से कितने नियमित आते है। जब सभी पुजारी वेतन पर है तो उन्हें चढावे में से 35 प्रतिशत हिंससा क्यों दिया जाता है। दान में पात्र खाद्यान्न विवरण भी सुस्पष्ट नहीं दर्शाया जा रहा हैं पुजारियां के प्रतिनिधि व्यवस्था भी जारी है, जब की इसकी वैधानिक व्यवस्था ही नहीं है। 16 पुजारियों में से कितने योग्य है कितने अयोग्य इसकी चर्चा भी हो रही है। अब तो सवाल उठ रहा की वास्तव में मंदिर आय व्यय, संपत्ति का आडर हुआ था या नहीं, यह भी अहं प्रश्न है। महाकाल को वैराग्यी भाव, चरित्र, व्यवहार, नीति, नियत व कार्य पसंद हैं अनेक रहस्य एनजेएफआई को प्राप्त हुए है। सभी को महाकाल भक्तों की अदालत में प्रस्तुत करेंगे।


