Published On:Friday, November 29, 2013
Posted by NJFI media
अटल ज्योति को खण्डित ज्योेति बनाया
उज्जैन। मुख्यमंत्री ने 24 घंटे बिजली का अखण्डल ज्योति अभियान चलाया था, किन्तु उज्जैन में यह अभियान खण्डित ज्योति व मजाक अभियान बना। बिजली मन लहरी हो गई। चाहे जब आती है व चाहे जब चली जाती है। परिवारों के विकृत उपकरण खराब हो रहे है। चुनाव बाद फिर यह स्थिति प्रतिदिन रही।
बिजली का निजीकरण नही होने देगी जनता
उज्जैन। जनवरी से बिजली व्यवस्था एरसल के अधिन हो जायेगी एक तो जनता को महंगी बिजली सरकार दे रही है उपर से निजीकरण भी थोप रही है। जनता का मानना है की बिजली का निजीकरण अन्याय है बिजली के निजीकरण का विचार बिजली कम्पनी व म.प्र. सरकार त्याग ही दे। यदि ऐसा नहीं किया तो जनता आदंालन धरना, प्रदर्शन व अनिश्चितकालीन बंद के कदम उठायेगी 2014 में भाजपा को गंभीर परिणाम भी भुगतना पडेंगे।
घटिया सडको का निर्माण
उज्जैन। म.प्र. सरकार में 20 करोड उज्जैन की सडके सुधारने हेतु स्वीकृत किए थे सडक बनाने की बजाय सडको पर थेगली लगाये जा रहे है वे भी आधे अधूरे जो सडके बनी है वे भी गुणवत्ताहीन है। जो सडक तीन वर्ष पूर्ण बनी थी उन्हें फिर से बनाया गया जबकि सडक निर्माता का दायित्व 10 वर्ष का सुनिश्चित है। मामला अति रोचक हैं।
बिजली का निजीकरण नही होने देगी जनता
उज्जैन। जनवरी से बिजली व्यवस्था एरसल के अधिन हो जायेगी एक तो जनता को महंगी बिजली सरकार दे रही है उपर से निजीकरण भी थोप रही है। जनता का मानना है की बिजली का निजीकरण अन्याय है बिजली के निजीकरण का विचार बिजली कम्पनी व म.प्र. सरकार त्याग ही दे। यदि ऐसा नहीं किया तो जनता आदंालन धरना, प्रदर्शन व अनिश्चितकालीन बंद के कदम उठायेगी 2014 में भाजपा को गंभीर परिणाम भी भुगतना पडेंगे।
घटिया सडको का निर्माण
उज्जैन। म.प्र. सरकार में 20 करोड उज्जैन की सडके सुधारने हेतु स्वीकृत किए थे सडक बनाने की बजाय सडको पर थेगली लगाये जा रहे है वे भी आधे अधूरे जो सडके बनी है वे भी गुणवत्ताहीन है। जो सडक तीन वर्ष पूर्ण बनी थी उन्हें फिर से बनाया गया जबकि सडक निर्माता का दायित्व 10 वर्ष का सुनिश्चित है। मामला अति रोचक हैं।


