Published On:Tuesday, November 26, 2013
Posted by NJFI media
सुप्रीम कोर्ट में PIL, 'आधार योजना असंवैधानिक'
नई दिल्ली। आधार योजना पर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि योजना असंवैधानिक है क्योंकि इसके तहत लिया जा रहा बायोमिट्रिक आंकड़ा व्यक्ति की निजता पर गुप्त प्रहार और अतिक्रमण है। अदालत ने यह बताए जाने के बाद कि कई राज्यों ने समाज कल्याण और आर्थिक कल्याण से संबंधित योजनाओं की पात्रता को आधार योजना से जोड़ दिया है, राजय सरकारों को नोटिस जारी किया।
विभिन्न राज्यों के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि हिंदू विवाह अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण, विवाह तय करने, स्कूल में नामांकन, वेतन लेने और आवश्यक सेवा लेने, रसोई गैस, ग्रामीण रोजगार योजना, रियायती खाद्यान्न और कई कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड जरूरी हो गया है।
वकील ने न्यायमूर्ति बी एस चौहान और न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की पीठ को बताया कि आधार योजना के लिए हालांकि कोई वैधानिक समर्थन नहीं है, लेकिन उसके बावजूद उंगलियों के निशान, चेहरे की तस्वीर और आंख की पुतलियों जैसे बायोमेट्रिक डिजिटल आंकड़े जमा किए जा रहे हैं जो एक सर्वर पर नहीं रखे जा सकते।
जनहित याचिका के मुख्य याची न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) के एस पुट्टास्वामी की ओर से पेश दीवान ने कहा कि यहां तक कि आधार योजना स्वैच्छिक है और यहां तक कि सरकार किसी नागरिक के ऐसे आंकड़े नहीं रख सकती, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा। दीवान ने अदालत से योजना के तहत जमा किए जा रहे आंकड़ों का दुरुपयोग किए जाने की आशंका जाहिर की।


