Published On:Saturday, December 28, 2013
Posted by NJFI media
मोहन भागवत महा निंद्रा कब छोड़ेगे
उज्जैन। संघ प्रमुख मोहन भागवत को स्वामी विवेकानंद के विचारो, सिद्धांतों व निर्णयों का सूक्ष्मता से संज्ञान है, किन्तु वे विवेक मार्ग की बजाय मोदी माह मार्ग का अनुसरण क्यों कर रहे है। लगता है की मोहन भागवत की आत्मा महानिंद्रा की स्थिति में आ गई है। संघ स्वंय को सत्य, संस्कृति, सभ्यता, सेवा मानवीय मूल्यों, आस्ािा, विश्वास, राष्टीयता एवं सामाजिकता का ठेकेदार ही मानता ह। क्या सत्य, न्याय, मानवों की कू्रर हत्या षडयंत्र, पूर्वाग्रह, झूठ, शाब्दिक लफाजी भ्रम व अफवाह बाजी, अंह, घिनौने षडयंत्र, पॅंूजीपतियों कालेधन कुबेरों उद्य़ोगपतियों कारपोेरट जगत की दलालाी, छल, कपट प्रायोजित लोक प्रियता की नाटक नौटंकी साम्प्रदायकिता विद्वेष धार्मिक उन्माद झूठी सिद्धांत वादिता इन्सानों का कू्ररता पूर्वक श्रृंगार, ईश्वर के सैनिकों को विश्रामगृह के षडयंत्र रचना देश विभूतियों को अपनी जागीरवादी समझना और उनका राजनीतिकरण करना, अपने निहित स्वार्थो हेतु देश विभाजक तत्वों को हवा देना, उनका संगठन खडा करना हिन्दुत्व को बदनाम व सर्कीणपरिवेश में लोना, सनातन धर्म को दोयम दर्जे बनाकर, हिन्दुत्व को अहमियत देना, क्या भारतीय संस्कार सभ्यता व दर्शन है। अंध विश्वास, चमत्कारों में विश्वास धन को साधन की बजाय साध्य बनाना क्या भारतीय सुसंस्कार ने तो उपरोक्त सभी बुराईयों को आत्मिक व चारित्रिक दुर्बलता आराध्य व विचारक विभूमि मानता है या नहीं। इस बात की भी स्पष्ट करना जरूरी ह। आत्म चिंतन सत्य से साक्षात्मकार, सभी का विवेकदीप प्रज्वलन निष्काम कर्म, त्याग सेवा, नियतिश्रृगार व जन उद्धार भी करना चाहिए। इस बात का भी लक्ष्य रहा है तो संघ उपरोक्त लक्ष्यों से विमुख क्यों? संघ नाजीवादी, षडयंत्री अहंकारी धन कुबरों के दल्ले मोदी मोह में क्यों उलझा है। सत्य न्या, मानवीय मूल्यों की कू्रर हत्या पूर्वा्रही चेहरे की हिरासत में क्यों हैं? क्या संघ पर ऐसे घिनौने चेहरे का एकाधिकार है। गौरी चकडी व मजंरी आॅंखों वालोें की झूठ सिद्धांतों से संघ मुक्त क्यों नहीं हो रहा मोदी जैसे घिनौने चेहरे को संघ अपना मुखौटा बना कर राजनीति क्यां कर रहा स्वदेशी आतंकियों के खिलाफ संघ मौन क्यों? आतंकवा की सच्ची परिभाषा है की जो भी देश व समाज की व्यवस्थाओं सुसंस्कारों को कुव्यवस्था व कुसंस्कारों में बदले वह आतंकी होता है चाहे वह दिवशेी हो या स्वदेशी। संघ उपरोक्त तत्वों के खिलाफ आवाज उठाना तो दूर उनकी हिरासत में क्यों है। संघ को आदर्शो का मकान माना जाता है।


