Published On:Wednesday, December 25, 2013
Posted by NJFI media
उ.प्र. में नए राजनैतिक समीकरण
उज्जैन। मायावती को अनेक प्रकरणों में क्लीन चिट मिली कांगे्रस ने बसपा से तालमेल हेतु कदम बढाये। रालोद भी कांग्रेस के गठबंधन में। इस नए समीकरण से सपा व भाजपा सकते में। नए समीकरण से सपा की राहे कठीन हुई वही भाजपा का तो पूरा गठित ही बिगड गया। उ.प्र. में त्रिकोणी संघर्ष होगा। दलित मतों का विभाजन होगा। सपा भाजपा में गठबंधन संभव ही नहीं बसपा कांगे्रस व रालोद पंथ निरपेक्ष मोचा तुंरत बनाए व तालमेल के साथ सामजस्य बनाए। इस प्रक्रिया से पंथ निरपेक्ष ताकतों का धु्रवीकरण होगा और नाजीवादी ताकते उ.प्र. मं 10 स्थान भी शायद ही प्राप्त कर पाए। बिहार व अन्य प्रंातों में भी पंथ निरपेक्ष मोर्चा अनिवार्य। सपा को 40 स्थानां पर अपने प्रत्याशी उतारना चाहिए। कांगे्रस को बसपा 20 तथा रालोद 4 स्थानों पर अपने प्रत्याशी खडे करना चाहिए। मुलायमसिंह की त्वरित पहल जरूरी। मुलायमसिंह को 35 स्थान पर जीत हेतु तालमेल करना जरूरी। पंथ निरपेक्ष मोर्चे का तालमेल हो गया तो भाजपा को दो स्थान जीतने मे पसीना आयेगा। उ.प्र. व बिहार में मत विीााजन रोकना जरूरी हैं।


