Published On:Thursday, December 5, 2013
Posted by NJFI media
बेटियों पर कू्ररता व सितमों की गाज
उज्जैन। हम अपने आपको महा आध्यात्मिक धार्मिक सामाजिक, उद्धारक जताते है, स्वंय को मसीहा व तारणहार जताते है किन्तु मातृशक्ति स्वरूपा बेटियों, बहनों मताओं पर कू्ररता बरपाते है। दहेज के लालच में उन्हें जिंदा जलाते है वहशी भूखे भेडिये बेटियां व बंधुओं के साथ बलात्कार करते है, माॅं बहनों के जिस्मों से खेलना, अपहरण करना और उन्हें बिस्तरो, बाजारो, डांसबार की रौनक व अपने स्वार्थ सिद्धि का साधना बनाते है। अपने जिगर के टुकडों को जहर देकर मौत की नींद सुलाते हैं। गया, जोधपुर की ताजी घटना है मातृशक्ति पर कू्ररतापूर्ण हमले करते है पत्नि की सोनाग्राफी करवाते है गर्भ में बेटी हो तो गर्भपात करवाते है, भूर्ण हत्याओं को अपना चरित्र बनाते है ये कुकृत्य व शिक्षित परिवारों में ही अधिक होत हैं। हम दोहरा चरित्र रखते है, बेटियों बचाने के प्रचार हेतु प्रदर्शन, रैलियों व विज्ञापन छपवाते है। दूसरी तरफ बेटियों व मातृशक्ति पर कू्रर प्रहार व हमले करते है। हम घिनौने चेहरे भूल जाते है कि बेटिया और बहू ही नहीं होगी तो वंश कौन चलायेगा।
बेटिायों को बोझ समझ कर उनकी हत्याएं करना जघन्य अपराध है। उनकी हत्या मातृशक्ति की हत्या का अपराध है। धिक्कार है ऐसे समाज व जीवन का जो दोहरा चरित्र रखते हैं इस घिनौने अपराध से दण्ड से हम एक नहीं कोटि कोटि जन्मों में भी मुक्त नहीं हो सकते।


