Published On:Sunday, December 29, 2013
Posted by NJFI media
मोदी क्या वास्तव में दुखी हैं
उज्जैन। न्यायालय के निण्रय के बाद मोदी अचानक गुजरात दंगों के मामले में करूणा और दुख के सागर में नजर आए।अपने टीव्हीट सन्देश में जो भी अभिव्यकित दी वह कृतिम एवं सत्तावादी षडयंत्र ही नजर आ रहा है न्यायिक निर्णय आने के पूव्र मोदी की आत्म व्यथा कौनसी कब्र में दफन थी मोदी ही बता सकते है। मोदी ने स्वीकार किया की दंगों में निर्दाष लोग मारे गए हैं मोदी को यह भी पता है कि दंगों के नायक कोन है किन किन ने वहशीपन का नेतृत्व किया है। उनके मंत्री भी अपराधी सिद्ध है। पुलिस ने दंगाईयों के खिलाफ कठोर कार्यवाही क्यों नहीं की, सरकारने अपना राज धर्म किस प्रकार निभाया। क्या सरकार कमजोर या लापरवाह थी दंगे रोकने में।
मोदी के मगर मच्छी आॅंसू का राज जनता जानती हैं जो भी हो गुजरात और मोदी के लिए ऐसा बुरा वक्त कभी नहीं आए। न्यायालय ने मोदी को क्लीन चीअ दे दी, किन्तु क्या मारे गए निर्दाष लागों की आत्मा एवं उनके परिजन मोदी को क्लीन चीट दे रहे हैं यह अहं सवाल हैं ये कलियुग है प्रायोजित षडयंत्रों एसआएस ने भी शायद स्व विवेकाधिकार का उपयोग ही नहीं किया। यदि मोदी दंगों के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष दोषी नहीं है तो कोडनानी कैसे अपराधी हो गई। वह तो मोदी सरकार की मंत्री थी। उपरोक्त तथ्य से स्पष्ष्ट हो रहा है की गुजरात सरकार की दंगे में भागीदारी थी
अब उच्च न्यायालय से ही दिवंगत निर्दोष लोगों की आत्मा व उनके परिजनों को विश्वास है। उच्च न्यायालय ने स्व. विवेक अधिकार का उपयोग कर न्याय दिया तो मोदी की मुसीबते अवश्य ही बढेगी। उच्च न्यायालय में घुटे हुए और छोडे गए साक्ष्यों की प्रस्तुति भी अनिवार्य हैं।


